भारत त्योहारों का देश है, और इन त्योहारों में 'होली' का स्थान सबसे निराला है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व न केवल रंगों का उत्सव है, बल्कि यह आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का प्रतीक भी है। प्रकृति के बदलते परिवेश और वसंत ऋतु के आगमन के साथ ही चारों ओर खुशियों की एक लहर दौड़ जाती है, जो हमें पुरानी कड़वाहट भूलकर गले मिलने का संदेश देती है। छोटी कक्षाओं के बच्चों को होली पर निबंध 10 लाइन (Holi par nibandh 10 line) में लिखने को कहा जाता है। इस लेख की मदद से होली पर 10 लाइन लिख सकते हैं।
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होली भारत का सबसे रंगीन और खुशी भरा त्योहार है।
यह फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।
यह वसंत ऋतु के आगमन और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
होलिका दहन में लोग लकड़ियां, उपले आदि एकत्र करके जलाते हैं जो अहंकार और द्वेष के अंत का संदेश देता है।
अगले दिन लोग एक-दूसरे पर गुलाल, अबीर और रंग डालते हैं।
बच्चे पिचकारियों से रंगीन पानी खेलते हैं और बहुत मस्ती करते हैं।
घरों में गुजिया, ठंडाई और मिठाइयाँ बनाई जाती हैं।
होली नफरत मिटाकर प्रेम, भाईचारा और एकता बढ़ाती है।
यह त्योहार हमें खुशी से जीने और रिश्तों को मजबूत करने की सीख देता है।
होली उल्लास और भाईचारे का प्रतीक है।
होली बुराई पर अच्छाई की जीत और आपसी प्रेम का वह पावन पर्व है, जो रंगों के माध्यम से भेदभाव मिटाकर समाज में भाईचारे का संचार करता है। वसंत की उमंग और पकवानों की मिठास के साथ यह त्योहार जीवन को खुशियों के सतरंगी रंगों से भर देता है।
होली पर निबंध 10 लाइन (Holi par nibandh 10 line)
होली पर 10 सुंदर और सरल पंक्तियां यहाँ दी गई हैं, जो आपके निबंध या भाषण के लिए उपयोगी हो सकती हैं:
होली भारत का एक प्रमुख और प्राचीन त्योहार है, जिसे 'रंगों का त्योहार' भी कहा जाता है।
यह पर्व प्रतिवर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है।
होली मुख्य रूप से दो दिनों का त्योहार है—पहले दिन होलिका दहन होता है और दूसरे दिन धुलेंडी (रंग वाली होली) खेली जाती है।
यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जो भक्त प्रहलाद और होलिका की कथा से जुड़ा है।
इस दिन लोग एक-दूसरे को अबीर और गुलाल लगाकर गले मिलते हैं और पुरानी कड़वाहट भूल जाते हैं।
होली के अवसर पर घरों में गुझिया, मठरी और मालपुआ जैसे स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं।
बच्चे पिचकारियों और गुब्बारों के साथ रंगों का आनंद लेते हैं, जिससे चारों ओर खुशी का माहौल होता है।
यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करता है, जब प्रकृति भी फूलों और हरियाली से सजी होती है।
होली हमें आपसी भाईचारा, प्रेम और एकता के साथ मिलजुलकर रहने का संदेश देती है।
रंगों का यह पावन उत्सव भारतीय संस्कृति की विविधता और जीवंतता को पूरी दुनिया में दर्शाता है।
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इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा की तिथि 2 मार्च की शाम 5.55 बजे से 3 मार्च की शाम 5.07 बजे तक थी। साथ ही भद्रा काल भी लगेगा। होलिका दहन के लिए नियम ऐसा है कि वह प्रदोष काल में होना चाहिए और उस समय भद्रा नहीं होना चाहिए। होली दहन 2 मार्च की रात होता लेकिन यह मुहूर्त रात 12.50 बजे से 2.20 बजे (3 मार्च की भोर) के बीच है। शास्त्रों में आधी रात के बाद होलिका दहन करना वर्जित है। ऐसे में 2 मार्च को रात 8 बजे से 8 बजकर 53 मिनट के बीच भद्रा मुख को छोड़कर होलिका दहन करना सही है। इस तरह 2 मार्च को पूर्णिमा के साथ ही भद्रा आरंभ होगी जो 3 मार्च को सुबह 5.25 तक रहेगी। इसलिए होलिका दहन 3 मार्च को भद्रा समाप्त होने पर करना उचित होता। होलिका जलाने का शुभ मुहूर्त शाम में 06:22 बजे से 08:50 बजे तक रहेग यानी इस अनुष्ठान के लिए लोगों के पास कुल अवधि 2 घंटे 28 मिनट की होगी। होली 4 मार्च 2026 को मनाई गई।
ज्यादातर पंचांगों के अनुसार होली 3 मार्च को खेली जानी चाहिए क्योंकि पूर्णिमा उसी दिन रहेगी लेकिन इस बार 3 मार्च को दोपहर 3.20 बजे से शाम 6.47 बजे तक चंद्रग्रहण भी है। ऐसे में सुबह से ही सूतक लग जाएगा। इस वजह से 3 मार्च को रंग नहीं खेलना चाहिए। पंडितों के अनुसार चंद्रग्रहण और सूतक के कारण 4 मार्च को होली खेलना ज्यादा सही है।