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ब्रिक्स (BRICS) विश्व की उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समूह है। BRICS नाम इसके शुरुआती सदस्य देशों – ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका – के अंग्रेजी नामों के पहले अक्षरों से बना है। यह समूह आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक राजनीति, व्यापार, विकास, तकनीक और बहुपक्षीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का प्रमुख मंच बन चुका है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर निबंध के इस लेख में ब्रिक्स सम्मेलन 2026 पर 100 शब्द, 200 शब्द, 500 शब्द, 10 लाइन के बारे में जानकारी दी गई है। इसकी मदद से आप ब्रिक्स के बारे में विस्तार से जान सकते हैं।
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों या शासनाध्यक्षों की वार्षिक बैठक है। इसमें सदस्य देश वैश्विक आर्थिक स्थिति, विकास, आपसी व्यापार, निवेश, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, तकनीकी सहयोग और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं। सम्मेलन में लिए गए निर्णय सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा तय करते हैं।
ब्रिक्स का विस्तार
समय के साथ ब्रिक्स का दायरा बढ़ा है। नए देशों के शामिल होने से यह समूह पहले की तुलना में अधिक व्यापक और विविध हो गया है। विस्तार का उद्देश्य विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देना तथा वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करना है।
भारत के लिए ब्रिक्स एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और आर्थिक मंच है। इसके माध्यम से भारत अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा सकता है। भारत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और विकासशील देशों के हितों को वैश्विक संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व दिलाने की मांग भी इस मंच के माध्यम से उठाता रहा है।
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ब्रिक्स देशों की संयुक्त आर्थिक और जनसंख्या क्षमता काफी बड़ी है। इसलिए वैश्विक अर्थव्यवस्था में इस समूह की भूमिका महत्वपूर्ण है। ब्रिक्स के माध्यम से सदस्य देश स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, वित्तीय सहयोग, बुनियादी ढांचे के विकास और नई विकास परियोजनाओं जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशते हैं। न्यू डेवलपमेंट बैंक भी सदस्य देशों की विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ब्रिक्स के सामने कई चुनौतियां भी हैं। सदस्य देशों की राजनीतिक व्यवस्थाएं, आर्थिक परिस्थितियां और विदेश नीति की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। कुछ देशों के बीच व्यापारिक और रणनीतिक मतभेद भी हैं। ऐसे में सभी सदस्य देशों की सहमति से प्रभावी निर्णय लेना आसान नहीं होता। समूह के विस्तार के बाद इन देशों के हितों में संतुलन बनाना भी एक बड़ी चुनौती है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका को मजबूत करने का माध्यम भी है। भारत के लिए यह अपनी आर्थिक और कूटनीतिक ताकत को बढ़ाने तथा वैश्विक मुद्दों पर अपनी भूमिका को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। आने वाले समय में आपसी सहयोग और मतभेदों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए ब्रिक्स वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत ने 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेजबानी की।
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का विवरण
नेतृत्व: भारत ने चौथी बार ब्रिक्स मंच की अध्यक्षता की।
इस संबंध में मुख्य विवरण निम्नलिखित हैं:
आधिकारिक BRICS 2026 Schedule के अनुसार बैठकों का क्रम इस प्रकार है:
10 सितंबर 2026: ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल और ब्रिक्स महिला बिजनेस एलायंस की वार्षिक बैठकें।
11 सितंबर 2026: ब्रिक्स बिजनेस फोरम (BRICS Business Forum) का मुख्य आयोजन। “मुख्य नेता सम्मेलन से पहले, ब्रिक्स व्यापार मंच 11 सितंबर को उसी स्थान पर आयोजित किया जाएगा, साथ ही महिला व्यापार गठबंधन का एक सत्र भी होगा।”
12-13 सितंबर 2026: सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों का मुख्य 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन।
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थीम (Motto): भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता की मुख्य थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability (BRICS)” है।
भागीदारी: विस्तारित 11-सदस्यीय ब्रिक्स समूह (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया) के व्यापारिक प्रतिनिधि और शीर्ष नेता इसमें हिस्सा ले रहे हैं।
चर्चा के विषय: बिजनेस फोरम और मुख्य सम्मेलन के दौरान डिजिटल व्यापार, क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स, राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग (De-dollarization), एमएसएमई (MSME) विकास, एआई (AI), और लचीली आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chains) जैसे आर्थिक व वित्तीय सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
ऊर्जा मंत्रियों की बैठक: 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक 25 जून 2026 को गुरुग्राम, हरियाणा में आयोजित की गई थी।
अन्य बैठकें: गांधीनगर में युवा शिखर सम्मेलन, जयपुर में उद्योग एवं पर्यटन मंत्रियों की बैठकें, और भोपाल में संस्कृति मंत्रियों की बैठक संपन्न हुई।
BRICS समिट: मुख्य शिखर सम्मेलन के साथ 12-13 सितंबर को निवेशकों के लिए inaugural iBRICS समिट भी आयोजित किया जा रहा है।
इस लेख में नीचे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर 10 लाइन, 100 शब्द, 200 शब्द और 500 शब्द के निबंध दिए गए हैं। इन्हें स्कूल परीक्षा के अनुसार सरल भाषा में लिखा गया है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर निबंध : 100 शब्द
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन विश्व की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच है। BRICS का नाम ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नामों से बना है। इस सम्मेलन में सदस्य देशों के प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, विकास, ऊर्जा और तकनीक जैसे विषयों पर चर्चा करते हैं। ब्रिक्स का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को मजबूत करना है। भारत के लिए यह सम्मेलन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसके माध्यम से भारत विकासशील देशों की समस्याओं और हितों को वैश्विक मंच पर मजबूती से रख सकता है। ब्रिक्स बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ब्रिक्स (BRICS) की औपचारिक स्थापना 16 जून 2009 को हुई थी, जब रूस के येकातेरिनबर्ग में इसका पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था।
शुरुआत (BRIC): वर्ष 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ब्राजील, रूस, भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक के बाद इस समूह की रूपरेखा तैयार हुई थी।
पहला सम्मेलन: 16 जून 2009 को रूस के येकातेरिनबर्ग शहर में पहला आधिकारिक शिखर सम्मेलन हुआ।
दक्षिण अफ्रीका का जुड़ना: वर्ष 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद यह समूह 'ब्रिक' (BRIC) से 'ब्रिक्स' (BRICS) बन गया।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन विश्व की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच है। BRICS नाम इसके प्रमुख संस्थापक देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अंग्रेजी नामों के पहले अक्षरों से बना है। समय के साथ इस समूह का विस्तार हुआ है और इसका वैश्विक प्रभाव भी बढ़ा है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष भाग लेते हैं। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, विज्ञान, तकनीक और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाना और विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक स्तर पर मजबूत करना है।
भारत के लिए ब्रिक्स का विशेष महत्व है। भारत इस मंच के माध्यम से विकासशील देशों के हितों को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व देने की बात रखता है। ब्रिक्स के माध्यम से सदस्य देश व्यापार, वित्त, तकनीक और विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का प्रयास करते हैं।
हालांकि सदस्य देशों की आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं, फिर भी साझा हितों के कारण ब्रिक्स का महत्व लगातार बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह समूह वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बना रह सकता है।
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ब्रिक्स (BRICS) का मूल फुल फॉर्म इसके शुरुआती पाँच संस्थापक सदस्य देशों के अंग्रेजी नामों के पहले अक्षरों से मिलकर बना है:
B - Brazil (ब्राजील)
R - Russia (रूस)
I - India (भारत)
C - China (चीन)
S - South Africa (दक्षिण अफ्रीका)
संक्षिप्त परिचय: यह दुनिया के उभरते हुए प्रमुख आर्थिक और विकासशील देशों का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन (समूह) है।
दक्षिण अफ्रीका का जुड़ना: साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इस समूह का नाम 'ब्रिक' (BRIC) से बदलकर 'ब्रिक्स' (BRICS) हो गया।
विस्तार: हालांकि इसका मूल नाम शुरुआती 5 देशों पर आधारित है, लेकिन अब इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे अन्य देश भी शामिल हो चुके हैं।
क्रमांक | शिखर सम्मेलन | तिथि | स्थान |
1 | 1वाँ ब्रिक शिखर सम्मेलन | 16 जून 2009 | येकातेरिनबर्ग, रूस |
2 | 2वाँ ब्रिक शिखर सम्मेलन | 16 अप्रैल 2010 | ब्रासीलिया, ब्राज़ील |
3 | 3वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन | 14 अप्रैल 2011 | सान्या, चीन |
4 | 4वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन | 29 मार्च 2012 | नई दिल्ली, भारत |
5 | 5वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन | 26–27 मार्च 2013 | डरबन, दक्षिण अफ्रीका |
6 | 6वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन | 14–16 जुलाई 2014 | फोर्टालेज़ा, ब्राज़ील |
7 | 7वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन | 8-9 जुलाई 2015 | उफा, रूस |
8 | 8वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन | 15-16 अक्टूबर 2016 | गोवा, भारत |
9 | 9वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन | 4-5 सितंबर 2017 | शियामेन, चीन |
10 | 10वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन | 25-27 जुलाई 2018 | जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका |
11 | 11वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन | 13-14 नवंबर 2019 | ब्रासीलिया, ब्राज़ील |
12 | 12वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन | 17 नवंबर 2020 | मॉस्को, रूस |
13 | 13वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन | 9 सितंबर 2021 | नई दिल्ली, भारत |
14 | 14वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन | 23-24 जून 2022 | बीजिंग, चीन |
15 | 15वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन | 22-24 अगस्त 2023 | जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका |
16 | 16वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन | 22-24 अक्टूबर 2024 | कज़ान, रूस |
17 | 17वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन | 6-7 जुलाई 2025 | रियो डी जेनेरियो, ब्राज़ील |
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन विश्व की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच है। BRICS नाम ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अंग्रेजी नामों के पहले अक्षरों से बना है। यह समूह आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक राजनीति और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा करता है।
ब्रिक्स की शुरुआत BRIC के रूप में हुई थी, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे। बाद में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हो गया। इसके बाद समूह का विस्तार हुआ और कई अन्य देशों को भी इसमें शामिल किया गया। विस्तार के कारण ब्रिक्स का आर्थिक और भौगोलिक प्रभाव पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष एक साथ बैठक करते हैं। इसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान एवं तकनीक और सतत विकास जैसे विषयों पर चर्चा की जाती है।
ब्रिक्स का एक प्रमुख उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक और वित्तीय सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके लिए सदस्य देश व्यापार और निवेश को आसान बनाने तथा विकास परियोजनाओं में सहयोग की संभावनाओं पर विचार करते हैं। न्यू डेवलपमेंट बैंक भी बुनियादी ढांचे और सतत विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहयोग देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और इस संगठन में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत ब्रिक्स के माध्यम से विकासशील देशों की समस्याओं को वैश्विक मंच पर उठाता है। भारत बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की आवश्यकता पर भी जोर देता है।
ब्रिक्स भारत के लिए व्यापार, निवेश, ऊर्जा, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अन्य देशों के साथ सहयोग बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। इसके अलावा, वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास पर सामूहिक प्रयासों के लिए भी यह मंच उपयोगी है।
ब्रिक्स के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। सदस्य देशों की राजनीतिक व्यवस्था, आर्थिक स्थिति और विदेश नीति अलग-अलग है। कई मुद्दों पर देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं। समूह के विस्तार के बाद अलग-अलग देशों के हितों में संतुलन बनाना भी चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद साझा आर्थिक और विकास संबंधी हित ब्रिक्स को एक साथ आगे बढ़ने का आधार प्रदान करते हैं।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन बदलती वैश्विक व्यवस्था में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साझा मंच प्रदान करता है। यह आर्थिक सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक मुद्दों पर सामूहिक आवाज उठाने का अवसर देता है। भारत के लिए ब्रिक्स एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और आर्थिक मंच है। भविष्य में आपसी सहयोग और सहमति को मजबूत करके ब्रिक्स विश्व की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अपनी भूमिका और अधिक प्रभावी बना सकता है।
ब्रिक्स (BRICS) समूह में वर्तमान में 11 सदस्य देश शामिल हैं।
सदस्य देश
ब्रिक्स के 11 पूर्ण सदस्य देशों के नाम निम्नलिखित हैं:
ब्राजील
रूस
भारत
चीन
दक्षिण अफ्रीका
मिस्र (इजिप्ट)
इथियोपिया
ईरान
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)
सऊदी अरब
इंडोनेशिया
ब्रिक्स विश्व की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण समूह है।
BRICS नाम ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नामों से बना है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के प्रमुख भाग लेते हैं।
इसमें आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की जाती है।
व्यापार, निवेश और विकास इसके प्रमुख विषय हैं।
ब्रिक्स विकासशील देशों के सहयोग को बढ़ावा देता है।
भारत ब्रिक्स का एक महत्वपूर्ण सदस्य है।
यह मंच वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर देता है।
ब्रिक्स के माध्यम से सदस्य देश विज्ञान, तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग करते हैं।
बदलती विश्व व्यवस्था में ब्रिक्स की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है।
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महत्वपूर्ण प्रश्न :
ब्रिक्स (BRICS) क्या है?
ब्रिक्स (BRICS) विश्व के ग्यारह प्रमुख उभरते बाजारों और विकासशील देशों का समूह है। इसमें शामिल देश हैं: ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात। यह समकालीन वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के मुद्दों तथा वैश्विक राजनीतिक व आर्थिक शासन संबंधी मुद्दों पर परामर्श और सहयोग का एक उपयोगी मंच है।
ब्रिक्स की स्थापना कब हुई?
ब्रिक्स को औपचारिक रूप से 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाशिए पर आयोजित ब्रिक विदेश मंत्रियों की पहली बैठक के दौरान आकार दिया गया था। पहला ब्रिक शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में आयोजित हुआ। 2010 में न्यूयॉर्क में ब्रिक विदेश मंत्रियों की बैठक में दक्षिण अफ्रीका को शामिल करके ब्रिक को ब्रिक्स में विस्तारित करने पर सहमति बनी। तदनुसार, दक्षिण अफ्रीका ने 2011 में सान्या में हुए तीसरे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लिया।
ब्रिक्स का विस्तार कब हुआ?
ब्रिक्स के सदस्य देश कौन–कौन से हैं?
ब्रिक्स ग्यारह देशों का समूह है:
ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात।
ब्रिक्स के साझेदार देश कौन से हैं?
2025 में ब्रिक्स में दस साझेदार देश शामिल हुए: बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम।
भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कितनी बार कर चुका है?
भारत 2026 में चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता करेगा। इससे पहले भारत ने 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी।
2025 तक कितने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन हो चुके हैं?
अब तक सत्रह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन हो चुके हैं:
17वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 6-7 जुलाई 2025 (रियो डी जेनेरियो, ब्राज़ील)
16वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 22-24 अक्टूबर 2024 (कज़ान, रूस)
15वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 22-24 अगस्त 2023 (जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका)
14वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 23-24 जून 2022 (बीजिंग, चीन)
13वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 9 सितंबर 2021 (नई दिल्ली, भारत)
12वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 17 नवंबर 2020 (मॉस्को, रूस)
11वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 13-14 नवंबर 2019 (ब्रासीलिया, ब्राज़ील)
10वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 25-27 जुलाई 2018 (जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका)
9वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 4-5 सितंबर 2017 (शियामेन, चीन)
8वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 15-16 अक्टूबर 2016 (गोवा, भारत)
7वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 8-9 जुलाई 2015 (उफा, रूस)
6वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 14–16 जुलाई 2014 (फोर्टालेज़ा, ब्राज़ील)
5वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 26–27 मार्च 2013 (डरबन, दक्षिण अफ्रीका)
4वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 29 मार्च 2012 (नई दिल्ली, भारत)
3वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 14 अप्रैल 2011 (सान्या, चीन)
2वाँ ब्रिक शिखर सम्मेलन: 16 अप्रैल 2010 (ब्रासीलिया, ब्राज़ील)
1वाँ ब्रिक शिखर सम्मेलन: 16 जून 2009 (येकातेरिनबर्ग, रूस)
ब्रिक्स में सहयोग के मुख्य क्षेत्र क्या हैं?
ब्रिक्स का एजेंडा अपने शुरुआती आर्थिक मुद्दों से काफी व्यापक हो गया है। यह मुख्य रूप से तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है:
राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग
आर्थिक और वित्तीय सहयोग
जन-से-जन आदान-प्रदान
ब्रिक्स सहयोग अब कई वैश्विक मुद्दों तक फैला हुआ है, जिनमें आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और वित्तीय स्थिति, दूरसंचार, कृषि, श्रम और रोजगार, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचा, व्यापार तथा विश्व व्यापार संगठन (WTO) शामिल हैं।
भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता का थीम क्या है?
भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय है – “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” (लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण)।
यह विषय प्रधानमंत्री द्वारा 2025 के रियो शिखर सम्मेलन में व्यक्त किए गए लोगों-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण को दर्शाता है।
भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता के लोगो का अर्थ क्या है?
भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता का लोगो परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मिश्रण है।
इसके केंद्र में कमल है, जो शुद्धता, लचीलापन और प्रगति का प्रतीक है। इसकी पंखुड़ियाँ सभी ब्रिक्स सदस्य देशों के जीवंत रंगों में हैं, जो सामूहिक शक्ति और एकता को दर्शाती हैं।
केंद्र में सुंदर “नमस्ते” मुद्रा भारत की गर्मजोशी, सम्मान और सामंजस्यपूर्ण सहयोग की शाश्वत भावना को व्यक्त करती है।

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