दिवाली पर निबंध (Diwali Essay in Hindi) - दिवाली... ये शब्द सामने आते ही रोशनी से जगमग घर, शहर की तस्वीर दिमाग में आ जाती है। दिवाली हर भारतीय के लिए अपनों से जुड़े होने और अच्छाई करने की प्रेरणा देने वाला महापर्व है। दिवाली हमारे देश भारत के सबसे लोकप्रिय व महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। दिवाली को दीपावली भी कहते हैं। दीपावली को प्रकाश का पर्व कहा जाता है। दीपावली अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। दिवाली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार है जो हमारे देश की संस्कृति, सामाजिकता और सौहार्द्र को वैश्विक स्तर पर दर्शाता है। दीपावली के अवसर पर पांच दिनों तक दीपोत्सव मनाया जाता है जिसका समापन भाई दूज के बाद होता है। देश ही नहीं विश्वभर में मौजूद भारतीय मूल के लोग इस त्योहार को धूमधाम से मनाते हैं।
ये भी पढ़ें : दिवाली पर भाषण । हिंदी पत्र लेखन
This Story also Contains
इस महापर्व को मनाने के पीछे कई मान्यताएं हैं। सबसे प्रमुख मान्यता भगवान राम द्वारा 14 वर्ष वनवास से अयोध्या आगमन की है। इस वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम द्वारा माता सीता को हर कर ले जाने वाले अहंकारी रावण पर विजय प्राप्त करने की खुशी भी शामिल है। दिवाली का त्योहार यह संदेश भी देता है कि बुराई चाहे रावण जैसी बलवान और बुद्धिवान क्यों न हो, उसका एक दिन अंत होकर ही रहता है। बुराई का साथ देने वाले भले इंद्रजीत, कुंभकर्ण जैसे महाबली क्यों न हों उनका भी विनाश होना तय है। अपने पूज्य राम की रावण पर विजय पाकर वनवास समाप्त कर अयोध्या वापसी की खुशी में अयोध्यावासियों ने धूमधाम और हर्ष-उल्लास के साथ सजावट और तैयारियांं कर इस दिन को उत्सव की तरह मनाया तब से हर साल इस दिन यानी कार्तिक अमावस्या को दीपावली का उत्सव मनाया जाता है।
दिवाली त्योहार तथा इसकी खूबियों से छात्रों को परिचित कराने के लिए छोटी कक्षाओं में दिवाली पर निबंध (Diwali Essay in Hindi) का प्रश्न हिंदी तथा अंग्रेजी दोनों भाषाओं में पूछा जाता है। इस हिंदी दिवाली निबंध (Diwali Essay in Hindi) से उन युवा शिक्षार्थियों को फायदा मिलेगा जो दीपावाली त्योहार पर हिंदी में निबंध (Diwali Essay in Hindi) लिखना चाहते हैं। साथ ही उन्हें Diwali 2025 kab hai के बारे में जानकारी भी प्राप्त होगी। हमने नीचे दिए गए निबंध में शुभ दिवाली त्योहार (Happy Diwali Festival in Hindi) के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने का एक छोटा-सा प्रयास किया है। बच्चे दिवाली पर हिंदी के इस निबंध (Diwali Essay in Hindi) से सीखकर लाभ उठा सकते हैं तथा वाक्य कैसे बनाएं एवं किन बातों को दीपावली निबंध (diwali ka nibandh) में जगह दी जाए, जैसी बातों को समझने के साथ ही अपने हिंदी लेखन कौशल को भी बेहतर बना सकते हैं।
ये भी देखें :
दिवाली हिंदुओं के सबसे लोकप्रिय व महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जिसे बड़े ही उत्साहपूर्वक और धूमधाम के साथ मनाया जाता है। बच्चों को दिवाली पर निबंध (diwali par nibandh) लिखकर त्योहार के बारे में अपने आनंदमय अनुभव साझा करने का अवसर मिलता है। युवा आम तौर पर इस त्योहार को बहुत पसंद करते हैं क्योंकि यह सभी के लिए ढेर सारी खुशियां और उल्लास के पल लेकर आता है। अपने घर-परिवार से दूर अन्य प्रदेश, विदेश में रहकर रोजगार करने लोग भी इस समय अपने घर-परिवार के साथ दिवाली मनाने के लिए लंबी यात्रा कर अपनों के बीच आते हैं और अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलते हैं तथा अपने प्रियजनों के साथ दिवाली शुभकामनाएं (Happy Diwali wishes in Hindi) और उपहार साझा करते हैं।
दिवाली पर निबंध (diwali par nibandh in hindi)
अधिकतर लोग इस दौरान ऑनलाइन साल 2025 में दिवाली कब है, ढूंढते रहते हैं (What is the real date of Diwali in 2025?)। ऐसे में आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्ष 2025 में दिवाली 20 अक्टूबर को मनाई गई। इस दिन विशेष रूप से धन की देवी माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। छात्र इस लेख में नीचे दिए गए दिवाली त्योहार पर निबंध (Essay of Diwali Festival) की जांच कर सकते हैं और दिवाली त्योहार के बारे में अपने व्यक्तिगत अनुभव व्यक्त करने या साझा करने के लिए इस विषय पर कुछ पंक्तियां लिखने का प्रयास कर सकते हैं। बच्चों को कक्षा मे दीपावली पर निबंध (dipawali per nibandh) लिखने को कहा जाता है। दिवाली पर निबंध (diwali par nibandh) लिखने के लिए आपको इस लेख से मदद मिलेगी।
दिवाली के पावन अवसर पर धन की देवी माँ लक्ष्मी, विघ्नहर्ता गणेश जी व कुबेर जी की विधि-विधान से पूजा (diwali puja time 2025) करने का विशेष महत्व माना गया है। लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में करने को सर्वाधिक फलदायक माना जाता है। इसके अलावा प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन विशेष फलदायक होता है। ऐसी मान्यता है कि स्थिर लग्न में की गई अपनी पूजा-आराधना से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी आराधक के घर में निवास करने लगती हैं। इस समय अधिकतर लोग ये जानना चाहते हैं कि Diwali 2025 kab hai। वर्ष 2025 में दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर को मनाया गया।
दीपावली का अर्थ: दिवाली जिसे "दीपावली" के नाम से भी जाना जाता है, भारत और दुनिया भर में रहने वाले हिंदुओं के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है। ‘दीपावली' संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है – दीप + अवली। ‘दीप’ का अर्थ होता है ‘दीपक’ तथा ‘अवली’ का अर्थ होता है ‘शृंखला’, जिसका मतलब हुआ दीपों की शृंखला या दीपों की पंक्ति। दीपावली का त्योहार कार्तिक मास के अमावस्या के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार दुनिया भर के लोगों द्वारा बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। हालांकि इसे हिंदू त्योहार माना जाता है, लेकिन विभिन्न समुदायों के लोग भी पटाखे और आतिशबाजी के जरिए इस उज्ज्वल त्योहार को मनाते हैं।
दीपावली त्योहार की तैयारी : दीपावली त्योहार की तैयारियां दिवाली से कई दिनों पहले ही आरंभ हो जाती है। दीपावली के कई दिनों पहले से ही लोग अपने घरों की साफ-सफाई व रंगाई-पुताई करने में जुट जाते हैं क्योंकि ऐसी मान्यता है कि जो घर साफ-सुथरे होते हैं, उन घरों में दिवाली के दिन माँ लक्ष्मी विराजमान होती हैं तथा अपना आशिर्वाद प्रदान करके वहां सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी करती हैं। दिवाली के नजदीक आते ही लोग अपने घरों को दीपक और तरह-तरह के लाइट्स से सजाना शुरू कर देते हैं।
दिवाली में पटाखों का महत्व : दीपावली को "रोशनी का त्योहार - प्रकाश पर्व" कहा जाता है। इस दिन लोग मिट्टी के बने दीपक जलाते हैं और अपने घरों को विभिन्न रंगों और प्रकारों की रोशनी से सजाते हैं, जिसे देखकर कोई भी मंत्रमुग्ध हो सकता है। इस पर्व में बच्चों को पटाखे जलाना और विभिन्न तरह के आतिशबाजी जैसे फुलझड़ियां, रॉकेट, फव्वारे, चक्री आदि बहुत पसंद होते हैं।
महत्वपूर्ण लेख:
दिवाली का इतिहास: हिंदू मान्यताओं के अनुसार, दिवाली के दिन ही भगवान श्री राम 14 वर्षों के वनवास के बाद अपनी पत्नी सीता, भाई लक्ष्मण और उनके उत्साही भक्त हनुमान के साथ अयोध्या लौटे थे, अमावस्या की रात होने के कारण दिवाली के दिन काफी अंधेरा होता है, जिस वजह से उस दिन पूरे अयोध्या को दीपों और फूलों से भगवान श्री राम चंद्र के लिए सजाया गया था, ताकि भगवान राम के आगमन में कोई परेशानी न हो, तब से लेकर आज तक इसे दीपों का त्योहार और अंधेरे पर प्रकाश की जीत के रूप में मनाया जाता है।
इस शुभ अवसर पर, बाजारों में भगवान गणेश जी, लक्ष्मी जी, राम जी आदि की मूर्तियों की खरीदारी की जाती है। इस दौरान बाजारों में खूब चहल-पहल होती है। लोग इस अवसर पर नए कपड़े, बर्तन, मिठाइयां आदि खरीदते है। हिंदुओं द्वारा देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है, क्योंकि व्यापारी दिवाली के पर्व पर नए बहीखाते की शुरुआत करते हैं। साथ ही, लोगों का मानना है कि यह खूबसूरत त्योहार सभी के लिए धन, समृद्धि और सफलता लाता है। लोग दिवाली के त्योहार के अवसर पर अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ उपहारों का आदान-प्रदान करने के लिए तत्पर रहते हैं।
दीपवाली से जुड़ी सामाजिक कुरीतियां
दीपावाली जैसे धार्मिक महत्व वाले पर्व के पावन अवसर पर भी कुछ असामाजिक तत्व अपने बुरी आदत जैसे शराब का सेवन, जुआ खेलना, टोना-टोटका करना और पटाखों के गलत इस्तेमाल से इसे ख़राब करने में जुटे रहते हैं। अगर समाज में दीपावाली के दिन इन कुरीतियों को दूर रखा जाए तो दिवाली का पर्व वास्तव में शुभ दीपावली हो जाएगा।
अन्य महत्वपूर्ण लेख :
ये भी पढ़ें : राष्ट्रीय खेल दिवस | गुरु नानक जयंती पर निबंध
दीपावली पर निबंध (dipawali per nibandh) 150 शब्द (कक्षा 4 और 5 के छात्रों के लिए)
दिवाली पर निबंध (diwali nibandh in hindi) कक्षा 4 और 5 के छात्रों के लिए 150 शब्दों में उपयुक्त हैं।
दिवाली पर निबंध हर साल परीक्षाओं में आने वाले सबसे महत्वपूर्ण निबंधों में से एक है। दिवाली, रोशनी का त्योहार है। यह हिंदू धर्म का एक बहुत पुराना उत्सव है। मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान राम ने रावण का वध किया और लंका विजय के बाद माता सीता को लेकर अध्योध्या वापस लौटे। भगवान राम के 14 वर्षों के वनवास की समाप्ति और रावण पर विजय के साथ माता सीता को मुक्त कराकर अयोध्या लौटने की खुशी में अयोध्यावासियों ने घर-घर दीपक जलाए। खुशियां मनाईं। यह परंपरा आज भी जारी है। दुनियाभर में हिंदू धर्मावलंबी बहुत उत्साह के साथ दीपावली मनाते हैं।
इस त्योहार को लेकर बच्चों में खासा उत्साह रहता है। घर, दुकान में दीपावली से पहले सफाई की जाती है। सभी लोग नए कपड़े पहनते हैं। बच्चे पटाखे छोड़ते हैं। लोग अपने घरों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाते हैं। दीपक जलाते हैं। दुकानों-प्रतिष्ठानो में मां लक्ष्मी की पूजा होती है। मिठाईयां बांटी जाती है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह अंधकार को दूर कर प्रकाश का भी प्रतीक है।
दिवाली पर निबंध (diwali nibandh in hindi) 250 शब्द (कक्षा 6,7 और 8 के छात्रों के लिए)
250 शब्दों की शब्द सीमा वाले दिवाली निबंध कक्षा 6,7 और 8 के छात्रों की परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। दिवाली उल्लास और उत्सव का समय है। यह वह दिन है जब राजा रामचंद्र ने असुर सम्राट रावण को हराया और 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटे। अयोध्या वापसी पर अयोध्यावासियों ने अपने राजा राम का स्वागत दीप जलाकर किया। मान्यता है कि रामचंद्र की वापसी की खुशी में दीपावली मनाई जाती है।
लोग रंग-बिरंगी रोशनी से घरों को सजाते हैं। दीप-मोमबत्ती जलाते हैं। पकवान बनते हैं। लोग नए कपड़े पहनते हैं। मां लक्ष्मी की पूजा होती है। बच्चे और बड़े पटाखे-आतिशबाजी करते हैं।
आतिशबाजी दिवाली का एक लोकप्रिय हिस्सा बन गई है, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि त्योहार की असली भावना अपने प्रियजनों के साथ खुशियाँ फैलाना है। दिवाली जैसे त्यौहार परिवारों और दोस्तों के बीच के आपके बंधन को मजबूत करता है। यह एक ऐसा समय है जब हर कोई अपने परिवारों के साथ जश्न मनाने के लिए अपने गृहनगर वापस जाता है।
दिवाली के अवसर पर राष्ट्रीय अवकाश रहता है। इसलिए हर कोई त्योहार का आनंद उठाता है। रात होते ही उत्साह बढ़ता है। हर तरफ रोशनी दिखती है। माहौल में उल्लास का अनुभव होता है। दिवाली हमें धैर्य और जीवन में अच्छी चीजों की प्रतीक्षा करने का मूल्य सिखाती है। बच्चे उत्सुकता से उन स्वादिष्ट मिठाइयों और पकवानों का इंतज़ार करते हैं। यह एक ऐसा समय भी है जब घरों और आसपास की जगहों की अच्छी तरह सफाई होती है। दिवाली इस बात की शिक्षा देती है कि "अच्छे लोग हमेशा बुरे लोगों पर विजय प्राप्त करते हैं।"
दिवाली पर 300 शब्दों में निबंध (कक्षा 9, 10 और 11 के छात्रों के लिए)
300 शब्दों में दिवाली पर निबंध (diwali festival information in hindi) कक्षा 9, 10 और 11 के छात्रों के लिए उनकी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह निबंध अक्सर हिंदी लेख में पूछा जाता है।
भारतीय संस्कृति में त्यौहार मानव जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। वे हमारे मूल्यों की एक विशेष याद दिलाते हैं। त्योहार हमारी एकता, उल्लास और मनुष्य एक सामाजिक प्राणी हैं, इसे चरितार्थ करते हैं। दीपावली एक ऐसा ही एक त्यौहार है जिसे बहुत खुशी के साथ मनाया जाता है। दिवाली एक हिंदू त्यौहार है जो लंका के राजा रावण के साथ एक बड़ी लड़ाई के बाद श्रीरामचंद्र की अयोध्या वापसी का प्रतीक है। यह अंधकार पर प्रकाश का द्योतक है। त्यौहार में लोग मिलजुलकर खुशियां बांटते हैं।
दिवाली हमें सभी के प्रति दयालु होने और धैर्य रखने की याद दिलाती है। हमारी मान्यताओं का हमारे सोचने के तरीके पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है, इसलिए हमें दिवाली जैसे त्यौहारों में अपने विश्वास को बनाए रखना चाहिए। हालांकि दिवाली की रात को लोग पटाखे और आतिशबाजी करते हैं। यह कई बार लोगों की असुविधा का भी कारण बनता है। आतिशबाज़ी हवा में हानिकारक गैसें छोड़ती हैं, जिससे प्रदूषण होता है। इससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। पटाखे की तेज आवाज आस-पास रहने वाले जानवरों को भी डराते हैं और उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए, दूसरों को खतरे में डाले बिना, ज़िम्मेदारी से जश्न मनाना ज़रूरी है। दिवाली के दौरान, हमारे घर ताज़े पके हुए खाने की स्वादिष्ट खुशबू से भर जाते हैं। हम त्योहार के दौरान बहुत सारे स्वादिष्ट व्यंजन बनाते हैं और उनका आनंद लेते हैं। लेकिन हमें यह याद रखना चाहिए कि त्योहार हमें करीब लाने और हमारे बंधन को मजबूत करने के लिए होते हैं, न कि उत्सव के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए। तो, आइए दिवाली को खुशी, दया और सभी जीवित प्राणियों और हमारे आस-पास की दुनिया के लिए विचार के साथ मनाएं।
दिवाली का त्योहार आने के 10-12 दिन पहले से ही बच्चों में इस त्योहार का उमंग दिखने लगता है। कोई अपने घरों में घरौंदा बनाने में जुट जाता है तो कोई कंदील तैयार करने में लग जाता है। स्कूलों में भी दिवाली के अवसर पर बच्चों के बीच रंगोली प्रतियोगिता, कंदील प्रतियोगिता जैसे इवेंट का आयोजन होता है जिसमें बच्चे अपनी रचनात्मक क्षमता दिखाते हैं। इस दौरान बच्चों का उत्साह देखते ही बनता है। इसके अलावा कई संस्थाओं द्वारा भी दिवाली पर कार्यक्रमों का आयोजन कर सामाजिक सद्भाव का संदेश देते हुए मिठाई और ग्रीन पटाखे बांटे जाते हैं।
दीपावली के दिन घर में मिट्टी का घरौंदा रखने का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। हालांकि बीते समय के साथ लोग इसको भूलने लगे हैं, लेकिन आज भी मान्यताओं को मानने वाले लोग मिट्टी, लकड़ी आदि से घरौंदा बनाकर घरों में रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली के दिन घर में घरौंदा बनाने से घर में माता लक्ष्मी का वास होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। कंदील सजाकर रखने से सकारात्मकता का भाव घर में बना रहता है।
दीपावली के अवसर पर बाजार में चहल-पहल बढ़ जाती है। तरह-तरह की दुकानें सजती हैं। मिट्टी के दीये, पटाखे, सजावट के सामान, फूल, कृत्रिम फूल, रंगोली बनाने का सामान, विभिन्न प्रकार की रंग-बिरंगी लाइट, कपड़े, मिठाईयां, बर्तन की दुकानें सड़क के किनारे सज जाती हैं। पूरा माहौल आनंद और उल्लास से भर जाता है। लोग घरों की सफाई करते हैं। घरों की रंगाई-पुताई का काम दिवाली से पहले संपन्न कराया जाता है। लोग घरेलू उपयोग में आने वाली नई चीजें खरीदते हैं। बाजार में उत्साह और उमंग का वातावरण रहता है। इस अवसर का लाभ ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियां भी उठाती हैं। वे ग्राहकों को तरह-तरह के लुभावने ऑफर देते हैं और छूट देकर अधिक से अधिक बिक्री करना चाहते हैं। लोग उपहार में एक-दूसरे को मिठाईयां देते हैं। कंपनियाें में अपने कर्मचारियों को गिफ्ट देने की परंपरा है। कंपनियां अपने कर्मियों को बर्तन, थर्मस, प्रेशर कूकर, आयरन, ट्रॉली बैग आदि के साथ ड्राई फ्रूट्स, मिठाईयां और नमकीन के पैकेट उपहार में देती हैं।
बच्चों को दीपावली का इंतजार सबसे अधिक इंतजार रहता है। क्योंकि उन्हें विभिन्न तरह के पटाखे चलाने को मिलता है। बच्चे अपने अभिभावकों से दिवाली से दो-चार दिन पहले ही अपने लिए फुलझड़ियां, अनार, पटाखे, बंदूक खरीदवा लेते हैं। और घर-बाहर धमा-चौकड़ी मचाते हुए पटाखे छोड़ते हैं। हालांकि पटाखे चलाते समय असावधानी रखने पर कभी-कभी दुर्घटना भी होती है। हाथ-पैर जल जाते हैं। इसलिए पटाखे चलाते समय बच्चों को ध्यान रखना चाहिए कि किसी को कोई नुकसान न हो। हालांकि दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध है। और भारी आवाज और रोशनी वाले पटाखे नहीं चला सकते। क्योंकि ये पटाखे भारी मात्रा में धुंआ छोड़ते हैं जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है। इससे सांस के मरीजों की तकलीफ बढ़ जाती है। वहीं तेज आवाज वाले पटाखे से जानवर खासकर कुत्ते सहम जाते हैं। इसलिए उनकी परेशानी का भी ध्यान रखना चाहिए। बिहार में भी राजधानी पटना के अलावे मुजफ्फरपुर, गया और हाजीपुर में किसी प्रकार के पटाखों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। क्योंकि पिछले वर्ष इन चार शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई बहुत खराब या गंभीर पाई गई थी। हालांकि ग्रीन पटाखों का उपयोग रात 8 से 10 बजे तक किया जा सकता है।
विभिन्न राज्यों में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ग्रीन पटाखों को छोड़कर अन्य सभी पटाखों के निर्माण, बिक्री, फोड़ने और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है। साथ ही कॉमर्शियल वेबसाइट पर पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाई गई है। ग्रीन पटाखों के लिए भी समय सीमा निर्धारित की गई है। ग्रीन पटाखों में प्रदूषण फैलाने वाल पीएम पार्टिकल्स कम मात्रा में होते हैं।
दिवाली स्वयं के अंदर के अंधकार को मिटा कर समूचे संसार को प्रकाशमय बनाने का त्योहार है। बच्चे इस दिन अपनी इच्छानुसार बम, फुलझड़ियाँ तथा अन्य पटाखे खरीदते हैं और आतिशबाजी का आनंद उठाते हैं। हमें इस बात को समझना होगा कि दीपावली के त्योहार का अर्थ दीप, प्रेम तथा सुख-समृद्धि से है। ऐसे में पटाखों का इस्तेमाल सावधानी पूर्वक और अपने बड़ों के सामने रहकर करना चाहिए। दिवाली का त्योहार हमें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। दीपावली का त्योहार सांस्कृतिक और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। इस त्योहार के कारण लोगों में आज भी सामाजिक एकता बनी हुई है। हिंदी साहित्यकार गोपालदास नीरज ने भी कहा है, "जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना, अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।" इसलिए दीपावली पर प्रेम और सौहार्द को बढ़ावा देने के प्रयत्न करने चाहिए।
इन्हें भी देखें
दीपावली एक महत्वपूर्ण पर्व है जिस पर सभी एक-दूसरे के साथ अपनी खुशियां साझा करते हैं और दूसरों के सुखमय जीवन की कामनाएं करते हैं। दीपावली के शुभ अवसर पर परिजनों, ईष्टमित्रों से किन शब्दों में अपनी शुभकामना व्यक्त करें, यह उलझन होती है। नीचे कुछ दिवाली शुभकामना संदेश दिए गए हैं जिनकी मदद से आपको अपनी भावना व्यक्त करने में सहूलियत होगी-
अन्य लेख पढ़ें-
1) दीपावली को दीपों का त्योहार या दीपोत्सव भी कहा जाता है।
2) दिवाली भारत के सबसे लोकप्रिय और महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है।
3) यह त्यौहार भगवान राम की याद में मनाया जाता है जो चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे।
4) इस अवसर पर हिंदू अनुयायी मिट्टी के दीपक जलाते हैं और अपने घरों को रंगोली से सजाते हैं।
5) बच्चे इस त्योहार पर पटाखे जलाकर बहुत खुश होते हैं।
6) हिंदुओं में इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
7) बच्चे, बूढ़े और जवान, सभी इस दिन धन की देवी माता लक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की पूजा करते हैं।
8) इस दिन सभी लोग अपने दोस्तों और पड़ोसियों को मिठाइयाँ और उपहार देते हैं।
9) भारत में इस दिन सार्वजनिक अवकाश रहता है और लोग इस त्योहार को बड़े धूम-धाम के साथ मनाते हैं।
10) यह हिंदुओं के सबसे प्रिय और आनंददायक त्योहारों में से एक है, जिसे अन्य धर्म और संप्रदाय के लोग भी आपस में मिलजुल कर मनाते हैं।
दिवाली 2025 में 20 अक्टूबर 2025 को मनाई गई। दीपावली को दीप उत्सव भी कहा जाता है, क्योंकि दीपावली का मतलब होता है दीपों की अवली यानि पंक्ति। दिवाली का त्यौहार अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है।
दिल्ली में ग्रीन पटाखे की अनुमति
दिल्ली में कोर्ट ने ग्रीन पटाखों की अनुमति दी जिसके बाद दिल्लीवासियों ने जमकर आतिशबाजी की। इस आतिशबाजी का परिणाम हुआ कि दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर में शामिल हो गई। दिवाली के बाद दिल्ली की हवा बेहद खराब हो गई। AQI 'खतरनाक' श्रेणी में है। कई जगहों पर AQI 900 के पार पहुंच गया है। मंगलवार को सुबह 6 बजे चाणक्य प्लेस में AQI 979 पर पहुंच गया। जबकि नारायणा गांव में AQI 940 दर्ज किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में ग्रीन पटाखों के लिए अनुमति प्रदान की है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे कुछ शर्तों के साथ लागू किया है। ग्रीन पटाखों की बिक्री केवल 18 से 21 अक्टूबर तक जिला कलेक्टर द्वारा चिन्हित स्थानों पर ही होगी। केवल पंजीकृत लाइसेंसधारी ही इन पटाखों की बिक्री कर सकेंगे। पटाखे जलाने का समय सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली के दिन होगा।

इससे पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 7 अक्टूबर 2025 को कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दीपावली के अवसर पर ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति देने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि हम ग्रीन पटाखे की अनुमति के लिए कोर्ट के सभी निर्देशों का पालन करेंगे।
ये भी पढ़ें :
यहाँ दीवाली के लिए कुछ हार्दिक शुभकामना संदेश दिए गए हैं:
1: दीवाली का यह पवित्र त्योहार आपके जीवन में अनंत खुशियां, समृद्धि और उजाला लाए। दीपों की रोशनी आपके घर को आलोकित करे। शुभ दीवाली!
2: दीवाली की जगमगाहट आपके जीवन से हर अंधेरा दूर करे और नई उम्मीदों का प्रकाश लाए। आपको और आपके परिवार को दीवाली की ढेर सारी शुभकामनाएं!
3: इस दीवाली, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश आपके घर में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद लाएं। दीपों का यह पर्व आपके लिए मंगलमय हो! शुभ दीवाली!
4: दीवाली का पर्व आपके जीवन में नई ऊर्जा, प्रेम और उत्साह भरे। दीपों की रोशनी की तरह आपका जीवन भी चमकता रहे। शुभ दीवाली!
5: इस दीवाली, आपके सभी सपने साकार हों और हर कदम पर सफलता आपके साथ हो। दीपों का यह त्योहार आपके लिए अनंत खुशियां लाए। शुभ दीवाली!
6: दीवाली की रंग-बिरंगी रोशनी आपके जीवन को खुशहाली और प्रेम से भर दे। आप और आपका परिवार सदा सुखी रहें। दीवाली की हार्दिक बधाई!
7: यह दीवाली आपके लिए नई शुरुआत और अनगिनत अवसर लेकर आए। दीपों की तरह आपका जीवन भी उज्ज्वल और सुंदर हो। शुभ दीवाली!
8: दीवाली के पावन पर्व पर आपको और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं! यह त्योहार आपके जीवन में सुख, समृद्धि, और प्रकाश लाए। दीपों की रोशनी से आपका घर और मन जगमगाए। शुभ दीवाली!
ये भी पढ़ें :
18 अक्टूबर : द्वादशी (शाम 6:31 तक), फिर त्रयोदशी,
प्रदोष व्रत, धनतेरस
19 अक्टूबर : चतुर्दशी (दोपहर 1:55 से)
हनुमान जन्मोत्सव, मेष लग्न: शाम 5:37–7:14
20 अक्टूबर : चतुर्दशी दोपहर 2:56 तक, फिर अमावस्या
कुंभ लग्न: 2:34–4:05, वृष लग्न: 7:10–9:06 पूजन शुभ
21 अक्टूबर : अमावस्या स्नान-दान
महावीर स्वामी निर्वाण दिवस
22 अक्टूबर : कार्तिक शुक्ल प्रतिप्रदा (शाम 6:18 तक)
गोवर्धन पूजा
23 अक्टूबर : कार्तिक शुक्ल द्वितीया
भैया दूज
चित्रगुप्त और कलम-दवात पूजन
दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। आम लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। इस त्यौहार का भारतीय लोकजीवन में बहुत महत्व है। इस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा सम्बन्ध दृष्टिगोचर होता है। इस पर्व की अपनी मान्यता और लोककथा है। गोवर्धन पूजा में गोधन अर्थात गायों की पूजा की जाती है। शास्त्रों में बताया गया है कि गाय उसी प्रकार पवित्र होती है जैसे नदियों में गंगा। गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा गया है। देवी लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृद्धि प्रदान करती हैं उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं। इनका बछड़ा खेतों में अनाज उगाता है। ऐसे गौ सम्पूर्ण मानव जाति के लिए पूजनीय और आदरणीय है। गौ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए ही कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोर्वधन की पूजा की जाती है और इसके प्रतीक के रूप में गाय की।
जब कृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलधार वर्षा से बचाने के लिए सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उँगली पर उठाकर रखा और गोप-गोपिकाएँ उसकी छाया में सुखपूर्वक रहे। सातवें दिन भगवान ने गोवर्धन को नीचे रखा और प्रतिवर्ष गोवर्धन पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने की आज्ञा दी। तभी से यह उत्सव अन्नकूट के नाम से मनाया जाने लगा।[1]
गोवर्धन पूजा के सम्बन्ध में एक लोकगाथा प्रचलित है। कथा यह है कि देवराज इंद्र को भारी अभिमान हो गया था। इंद्र का अभिमान चूर करने हेतु भगवान श्री कृष्ण जो स्वयं लीलाधारी श्री हरि विष्णु के अवतार हैं ने एक लीला रची। प्रभु की इस लीला में की कथा है कि एक दिन भगवान कृष्ण ने देखा के सभी बृजवासी उत्तम पकवान बना रहे हैं और किसी पूजा की तैयारी में जुटे। श्री कृष्ण ने बड़े भोलेपन से मईया यशोदा से प्रश्न किया " मईया ये आप लोग किनकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं" कृष्ण की बातें सुनकर मैया बोली लल्ला हम देवराज इंद्र की पूजा के लिए अन्नकूट की तैयारी कर रहे हैं। मैया के ऐसा कहने पर श्री कृष्ण बोले मैया हम इंद्र की पूजा क्यों करते हैं? मैईया ने कहा वह वर्षा करते हैं जिससे अन्न की उपज होती है उनसे हमारी गायों को चारा मिलता है। भगवान श्री कृष्ण बोले हमें तो गोर्वधन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि हमारी गाये वहीं चरती हैं, इस दृष्टि से गोर्वधन पर्वत ही पूजनीय है और इंद्र तो कभी दर्शन भी नहीं देते व पूजा न करने पर क्रोधित भी होते हैं अत: ऐसे अहंकारी की पूजा नहीं करनी चाहिए।
लीलाधारी की लीला और माया से सभी ने इन्द्र के स्थान पर गोवर्घन पर्वत की पूजा की। देवराज इंद्र ने इसे अपना अपमान समझा और मूसलाधार वर्षा आरम्भ कर दी। प्रलय के समान वर्षा देखकर सभी बृजवासी भगवान कृष्ण को कोसने लगे कि, सब इनका कहा मानने से हुआ है। तब मुरलीधर ने मुरली कमर में डाली और अपनी कनिष्ठा उंगली पर पूरा गोवर्घन पर्वत उठा लिया और सभी बृजवासियों को उसमें अपने गाय और बछडे़ समेत शरण लेने के लिए बुलाया। इंद्र कृष्ण की यह लीला देखकर और क्रोधित हुए फलत: वर्षा और तेज हो गयी। इंद्र का मान मर्दन के लिए तब श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियन्त्रित करें और शेषनाग से कहा आप मेड़ बनाकर पानी को पर्वत की ओर आने से रोकें।
इंद्र निरन्तर सात दिन तक मूसलाधार वर्षा करते रहे तब उन्हे लगा कि उनका सामना करने वाला कोई आम मनुष्य नहीं हो सकता अत: वे ब्रह्मा जी के पास पहुंचे और सब वृतान्त कह सुनाया। ब्रह्मा जी ने इंद्र से कहा कि आप जिस कृष्ण की बात कर रहे हैं वह भगवान विष्णु के साक्षात अंश हैं और पूर्ण पुरूषोत्तम नारायण हैं। ब्रह्मा जी के मुख से यह सुनकर इंद्र अत्यन्त लज्जित हुए और श्री कृष्ण से कहा कि प्रभु मैं आपको पहचान न सका इसलिए अहंकारवश भूल कर बैठा। आप दयालु हैं और कृपालु भी इसलिए मेरी भूल क्षमा करें। इसके पश्चात देवराज इन्द्र ने मुरलीधर की पूजा कर उन्हें भोग लगाया।
इस पौराणिक घटना के बाद से ही गोवर्धन पूजा की जाने लगी। बृजवासी इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं। गाय बैल को इस दिन स्नान कराकर उन्हें रंग लगाया जाता है व उनके गले में नई रस्सी डाली जाती है। गाय और बैलों को गुड़ और चावल मिलाकर खिलाया जाता है।
पुराणों में वर्णित है कि सृष्टि के निर्माण के उद्देश्य से जब भगवान विष्णु ने अपनी योग माया से सृष्टि की कल्पना की तो उनकी नाभि से एक कमल निकला जिस पर ब्रह्मा जी आसीन थे। इन्होंने सृष्ट की रचना की और देव-असुर, गंधर्व, अप्सरा, स्त्री-पुरूष पशु-पक्षी को जन्म दिया। इसी क्रम में यमराज का भी जन्म हुआ जो धर्मराज कहलाए, क्योंकि धर्मानुसार उन्हें जीवों को सजा देने का कार्य प्राप्त हुआ था। धर्मराज ने जब एक योग्य सहयोगी की मांग ब्रह्मा जी से की तो वह ध्यानलीन हो गये और एक हजार वर्ष की तपस्या करते रहे। उनके तेज से एक पुरुष उत्पन्न हुआ। इस पुरुष का जन्म ब्रह्मा जी की काया से हुआ था अत: ये कायस्थ कहलाये और इनका नाम चित्रगुप्त पड़ा।
अन्य लेख पढ़ें-
महत्वपूर्ण प्रश्न :
दीपावली पर निबंध (essay on diwali in hindi) 150 शब्दों में कैसे लिखा जाता है?
(दिवाली पर 150 शब्दों में निबंध deepavali essay in hindi) : दीपावली या दिवाली अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह त्योहार आमतौर पर पांच दिनों तक चलता है और घरों और गलियों में तेल के दीये जलाकर और रंग-बिरंगी सजावट करके मनाया जाता है। लोग अपने घरों की सफ़ाई और सजावट करते हैं, उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं और ख़ास मिठाइयां और पकवान बनाते हैं। दीवाली के अवसर पर लोग घरों और दुकानों में पूजा-पाठ करते हैं।
इस त्यौहार का मुख्य आकर्षण आतिशबाजी है, जो रात के आसमान को चटक रंगों से भर देती है। परिवार देवी-देवताओं की भी पूजा करते हैं, जिनमें धन की देवी लक्ष्मी, इस उत्सव में मुख्य भूमिका निभाती हैं। त्योहारों के अलावा, दिवाली का सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक महत्व भी है। यह एकता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देती है, क्योंकि परिवार इस त्यौहार को मनाने के लिए एक साथ आते हैं। इसके अतिरिक्त, यह त्यौहार हिंदू, जैन और सिख सहित विभिन्न समुदायों के लिए गहरा आध्यात्मिक महत्व रखता है, और प्रत्येक इसे अलग-अलग कारणों से मनाता है। प्रकाश का यह त्यौहार लोगों और राष्ट्र के जीवन में समृद्धि लाता है।
दीपावली का मुख्य बिंदु क्या है?
दिवाली भारत के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जिसे लाखों लोग बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं। यह अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। यह त्योहार भगवान राम, उनकी पत्नी सीता और उनके भाई लक्ष्मण के 14 वर्ष के वनवास के बाद अपने राज्य अयोध्या लौटने की याद में मनाया जाता है।
दिवाली का दूसरा नाम क्या है?
दिवाली के अन्य नाम दीपावली, दीपोत्सव और प्रकाशोत्सव हैं। यह त्योहार 'दीपों की पंक्ति' या 'रोशनी की श्रृंखला' से निकला है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का प्रतीक है।
अयोध्या में दीपावली क्यों मनाई जाती है?
मान्यता के अनुसार, त्रेता युग में इस दिन प्रभु राम ने 14 वर्षों के वनवास के बाद लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या वापस लौटे थे। उस समय अयोध्या के लोगों ने अपने प्रिय राजा के स्वागत में पूरे नगर को दीपों से सजाया और उत्सव मनाया, जो अब दीपावली के रूप में मनाया जाता है।
दिवाली कैसे मनाई जाती है?
दिवाली रोशनी का त्योहार है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। दीवाली घरों की सजावट, दीये जलाकर, आतिशबाजी, नए कपड़े पहनकर, पारंपरिक मिठाइयों और उपहारों के आदान-प्रदान और परिवार के साथ उत्सव मनाकर मनाया जाता है, जिसमें धन की देवी लक्ष्मी की पूजा शामिल है।
दिवाली से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
दिवाली से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अंधकार पर प्रकाश की, बुराई पर अच्छाई की और असत्य पर सत्य की विजय होती है। यह त्योहार हमें आशावादी, साहसी और उदारता व कृतज्ञता जैसे मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है। साथ ही, यह भीतर के अंधकार को दूर कर ज्ञान और सकारात्मकता अपनाने का भी संदेश देता है।
दीपावली का इतिहास क्या है?
दिवाली का इतिहास कई धार्मिक और ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है। इसका सबसे प्रसिद्ध संबंध भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटने से है, जब लोगों ने उनके स्वागत में दीये जलाए थे। इसके अलावा, दीपावली भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध, समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी के प्रकट होने और जैन धर्म में भगवान महावीर के निर्वाण जैसे कारणों से भी मनाया जाता है। सिख धर्म में, इसे 'बंदी छोड़ दिवस' के रूप में मनाया जाता है जब गुरु हरगोबिंद सिंह को कै़द से रिहा किया गया था।
ये भी पढ़ें :
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिवाली 14 साल के वनवास के बाद भगवान राम की अयोध्या वापसी और साथ ही अंधकार पर रोशनी का प्रतीक है। अपने घरों की सफाई और उन्हें तरह तरह के लाइट से सजाने के बाद लक्ष्मी गणेश की पूजा के साथ दीपावली का त्योहार धूम धाम से मनाया जाता है, तथा रात के समय बच्चे आतिशबाजी का भी लुफ्त उठाते हैं।
इस त्योहार के दौरान, लोग अपने घरों को रंगोली और तेल के दीयों से सजाते हैं, जिन्हें दीपक कहा जाता है। सभी एक दूसरे को बधाई देते हैं, अच्छे अच्छे पकवान बनाते हैं, पटाखों से आतिशबाजी करते हैं और मिल-जुल कर सौहार्द के साथ दिवाली के पर्व को मनाते हैं।
दीपावली' संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है – दीप + आवली। ‘दीप’ अर्थात ‘दीपक’ और ‘आवली’ अर्थात ‘श्रृंखला’, जिसका मतलब हुआ दीपकों की श्रृंखला या दीपों की पंक्ति।
आप इस लेख की सहायता से दिवाली पर हिंदी में निबंध लिख सकते है, पूरे लेख को ध्यान से पढ़ें और समझें की आप किस तरह से दिपावली पर हिंदी निबंध लिख सकते हैं।
दिवाली का त्योहार मिट्टी के दीप या फिर तरह -तरह के लाइट और रंगोली से अपने घर को सजा कर, खुशियां बाँट कर, लक्ष्मी गणेश की पूजा करके, अच्छे अच्छे पकवान बना कर हर्ष और उल्लास के साथ दिवाली का त्योहार मनाया जाता है।
साल 2024 में दिवाली 31 अक्टूबर को मनाई गई। हालांकि कुछ प्रदेशों में 1 नवंबर को भी दीपावली मनाई गई।
लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में करना सर्वाधिक फलदायक माना जाता है। प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन का और विशेष महत्व है।
दिवाली रोशनी का हिंदू त्योहार है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक एक खुशी का उत्सव है। यह पूरे भारत में और दुनिया भर के हिंदुओं द्वारा बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। यह त्योहार राक्षस राजा रावण को हराने के बाद भगवान राम के अयोध्या लौटने की याद में मनाया जाता है।
दीपावली के दिन भगवान श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके अपने घर अयोध्या लौटे थे। इतने सालों बाद घर लौटने की खुशी में सभी अयोध्या वासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दीपों के त्योहार दीपावली मनाया जाने लगा।
दीपावली यानि यह प्रकाश का पर्व है। दीये की रोशनी से अंधकार का नाश होता है। अन्धकार अज्ञानता और नकारात्मकता का प्रतीक है। आध्यात्मिक दृष्टि से, दीपक का प्रकाश आत्मज्ञान और सत्य की विजय का प्रतीक है। यह त्योहार हमें यह संदेश देता है कि हमें अपने जीवन में सत्य और ज्ञान के प्रकाश को जलाए रखना चाहिए, ताकि अज्ञानता और अधर्म का अंधकार दूर हो सके। दीये की यह रोशनी हमारे भीतर की अच्छाइयों का भी प्रतीक है, जिसे हमें हर समय जलाए रखना चाहिए। यह त्योहार हमें प्रकाश, समृद्धि और एकता का संदेश देता है। दीपावली की रात्रि, अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का प्रतीक है। हमें अपने कार्य में भी इसी प्रकाश को फैलाने का प्रयास करना चाहिए। इस समय, हम सभी अपने परिवारों के साथ मिलकर खुशियाँ बांटें और नये लक्ष्यों की ओर अग्रसर हों।
On Question asked by student community
Hi! If you’re looking for the Class 11 English half yearly question paper for 2025-26 (CBSE board), you’ll find the right resource once you check the link provided from Careers360. Solving previous or sample papers is a smart way to prepare, as it helps you understand the question types, marking scheme, and important topics. This practice will boost your confidence and help you manage your time well in the actual exam.
https://school.careers360.com/boards/cbse/cbse-class-11-half-yearly-sample-papers-2025-26
Hi dear candidate,
Could you please specify us the board of education for which you need the half yearly question papers of class X so that we can help you further.
Below are few links which may help you and it has all the subjects with English as well:
CBSE Class 10 Half Yearly Exam Question Paper 2025-26 with Answer Key & Analysis
ICSE Class 10 Half Yearly Sample Papers 2025-26 PDF (All Subjects)
BEST REGARDS
Hi dear candidate,
Can you please specify the board of education or state for which you need to know the exam pattern and syllabus so that we can guide you accordingly.
Since, most of the boards uses NCERT as base syllabus, you can refer to the link below:
NCERT Syllabus for Class 10 – All Subjects PDF Download 2025-26
Exam pattern:
CBSE 10th New Exam Pattern 2026- Marking Scheme, Subject-Wise Exam Pattern
BEST REGARDS
The CBSE Class 10th Board Exams for the 2026 session will follow the revised curriculum, emphasizing competency-based questions.
Conducting Body: Central Board of Secondary Education (CBSE).
Exam Period: The main theory exams are typically held between February and April 2026.
Grading: Based on marks in five main subjects plus internal assessment marks (often 20 marks per subject) provided by the school.
Passing Criteria: You must achieve at least 33% overall in each subject (theory + practical/internal assessment combined) to be declared pass.
The most crucial element of your preparation is understanding the exam structure:
Syllabus: Strictly adhere to the rationalized syllabus released by CBSE for the 2025-26 academic year.
Practice: Your primary resource should be the latest sample papers and previous year question papers. These accurately reflect the format and types of competency questions being asked.
For the most comprehensive and official announcements, including the detailed time table and access to crucial practice materials, always check the official board updates, as tracked by Careers360: https://school.careers360.com/exams/cbse-class-10th .
HELLO,
If you want admission to 9th grade under the CBSE board in Andhra Pradesh , visit nearby CBSE affiliated schools during the admission period that is generally from January to April or you can check the official websites of the schools in which you are interested for admission if they are accepting the admissions now .
After deciding the school and getting information about admission deadline from the school you can fill out the admission form with documents submission like your previous report card , transfer certificate and birth certificate , they make take entrance test or interview to confirm your admission
To know more visit :- https://school.careers360.com/schools/cbse-schools-in-andhra-pradesh
Hope this Helps!
As per latest syllabus. Physics formulas, equations, & laws of class 11 & 12th chapters
As per latest syllabus. Chemistry formulas, equations, & laws of class 11 & 12th chapters
As per latest 2024 syllabus. Study 40% syllabus and score upto 100% marks in JEE
As per latest syllabus. Maths formulas, equations, & theorems of class 11 & 12th chapters