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    होली पर निबंध 100, 150 शब्दों में (Holi Par Nibandh 100, 150 Words in Hindi)
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    होली पर निबंध 100, 150 शब्दों में (Holi Par Nibandh 100, 150 Words in Hindi)

    Mithilesh KumarUpdated on 04 Aug 2026, 10:24 AM IST

    होली भारत का प्रमुख त्योहार है। होली भारत के लगभग हर राज्य में धूमधाम से मनाई जाती है। विद्यार्थियों से विभिन्न कक्षाओं में होली पर निबंध संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इस लेख में होली पर निबंध 100 शब्दों में, होली पर निबंध 150 शब्दों में लिख सकते हैं।

    होली पर निबंध 100, 150 शब्दों में (Holi Par Nibandh 100, 150 Words in Hindi)
    होली पर निबंध 100, 150 शब्दों में (Holi Par Nibandh 100, 150 Words in Hindi)

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    होली पर निबंध 100 शब्दों में

    होली भारत का सबसे रंगीन और उल्लासपूर्ण त्योहार है। यह वसंत ऋतु के आगमन और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। होली में लोग एक-दूसरे पर रंग, गुलाल और अबीर डालते हैं। पानी में रंग घोलकर बच्चे पिचकारियों से एक–दूसरे पर डालते हैं, जबकि बड़े लोग मिठाइयाँ, गुजिया और ठंडाई का आनंद लेते हैं। होलिका दहन की परंपरा होलिका और प्रह्लाद की कथा से जुड़ी है, जो भक्ति और सत्य की शक्ति दर्शाती है। होली मनमुटाव को मिटाकर आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देती है। यह त्योहार खुशी, उत्साह और एकता का उत्सव है।

    होली पर निबंध 150 शब्दों में

    होली भारत का सबसे जीवंत और रंग-बिरंगा त्योहार है, जिसे वसंत ऋतु के आगमन और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को पड़ने वाला यह पर्व पुराणों में वर्णित प्रह्लाद और होलिका की कथा से जुड़ा है। होलिका दहन की रात लोग लकड़ियों की चिता जलाते हैं, जो अहंकार और दुष्टता के अंत का संदेश देता है।

    अगले दिन लोग एक-दूसरे पर गुलाल, अबीर और रंग वाला पानी डालते हैं। बच्चे पिचकारियों से खेलते हैं, जबकि युवा और बुजुर्ग ठंडाई, गुजिया और मिठाइयों का मजा लेते हैं।

    होली न केवल रंगों का त्योहार है, बल्कि यह वैमनस्य, पुरानी शिकायतों को धोकर आपसी प्रेम, भाईचारा और एकता को मजबूत करती है। यह खुशी, उमंग और नई शुरुआत का प्रतीक है, जो समाज को एक सूत्र में बांधता है।

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    होली कब है 2027 ? (holi kab hai 2027)

    साल 2027 में होली का मुख्य त्योहार (रंगवाली होली) 22 मार्च, सोमवार को मनाया जाएगा। इससे एक दिन पहले 21 मार्च, रविवार को होलिका दहन (छोटी होली) होगी। होलिका दहन के अगले दिन यानी फाल्गुन पूर्णिमा को रंगों वाली होली मनाई जाती है। इसे धूलेंडी भी कहते हैं।

    होलिका दहन का मुहूर्त

    होलिका दहन के शुभ मुहूर्त का अपना महत्व है। कहा जाता है कि होलिका दहन से आस-पास नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। विज्ञान की दृष्टि से देखें तो होली पहले ही मौसम अनुकूल हो जाने के चलते बीमारियां फैलाने के लिए जिम्मेदार घातक सूक्ष्मजीवों की बाढ़ आ जाती है, होलिका की आग से कफी हद तक इनका विनाश भी हो जाता है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को भद्रा रहित मुहूर्त में होलिका दहन होता है।

    होली कब है 2026 ? (holi kab hai 2026)

    होलिका दहन के अगले दिन यानी फाल्गुन पूर्णिमा को रंगों वाली होली मनाई जाती है। साल 2026 में पूर्णिमा तिथि 2 मार्च (सोमवार) को शाम में 5:55 बजे शुरू होकर अगले दिन यानी 3 मार्च (मंगलवार) को शाम 5:07 बजे समाप्त होगी। लेकिन इस बार होली का रंगारंग त्योहार अगले दिन यानी बुधवार 4 मार्च (बुधवार), 2026 को मनाया गया।

    होलिका दहन 2026 मुहूर्त:

    इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा की तिथि 2 मार्च की शाम 5.55 बजे से 3 मार्च की शाम 5.07 बजे तक रहेगी। साथ ही भद्रा काल भी लगेगा। होलिका दहन के लिए नियम ऐसा है कि वह प्रदोष काल में होना चाहिए और उस समय भद्रा नहीं होना चाहिए।

    पंडितों के अनुसार इस साल 2 मार्च को ही पूर्णिमा प्रदाेष व्यापिनी है यानी प्रदोष काल को स्पर्श कर रही है। 3 मार्च को पूर्णिमा प्रदोष काल में नहीं आ रही। भद्रा आधी रात के बाद सुबह 5.32 पर समाप्त होगी। होली दहन 2 मार्च की रात होता लेकिन यह मुहूर्त रात 12.50 बजे से 2.20 बजे (3 मार्च की भोर) के बीच है। शास्त्रों में आधी रात के बाद होलिका दहन करना वर्जित है। ऐसे में 2 मार्च को रात 8 बजे से 8 बजकर 53 मिनट के बीच भद्रा मुख को छोड़कर होलिका दहन करना सही है। इस तरह 2 मार्च को पूर्णिमा के साथ ही भद्रा आरंभ होगी जो 3 मार्च को सुबह 5.25 तक रहेगी। इसलिए होलिका दहन 3 मार्च को भद्रा समाप्त होने पर करना उचित रहेगा।

    द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में होलिका दहन मंगलवार, 3 मार्च को होगा। होलिका जलाने का शुभ मुहूर्त शाम में 06:22 बजे से 08:50 बजे तक रहेग यानी इस अनुष्ठान के लिए लोगों के पास कुल अवधि 2 घंटे 28 मिनट की होगी। होली 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी।

    होली कब है 2026 ? (holi kab hai 2026)

    ज्यादातर पंचांगों के अनुसार होली 3 मार्च को खेली जानी चाहिए क्योंकि पूर्णिमा उसी दिन रहेगी लेकिन इस बार 3 मार्च को दोपहर 3.20 बजे से शाम 6.47 बजे तक चंद्रग्रहण भी है। ऐसे में सुबह से ही सूतक लग जाएगा। इस वजह से 3 मार्च को रंग नहीं खेलना चाहिए। पंडितों के अनुसार चंद्रग्रहण और सूतक के कारण 4 मार्च को होली खेलना ज्यादा सही है।

    होली पर भद्रा का साया: साल 2026 में होली के समय भद्रा की अशुभ छाया भी मंडरा रही है, जो सुबह 01:25 बजे से शाम 04:30 बजे तक रहेगी। रिवाजों के अनुसार, इस दौरान कोई शुभ कार्य करना टाला जाता है।

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