महात्मा गांधी पर निबंध : वर्ष 2026 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जयंती की 157वीं जयंती मनाई जाएगी। हमारे देश भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी यानी बापू का जीवन समूचे संसार के लिए प्रेरणा का स्रोत है। महात्मा गांधी उन महान लोगों में से एक हैं, जिन्होंने न सिर्फ ब्रिटिश हुकूमत से भारत को आजादी दिलाने की लड़ाई में भारतीयों का नेतृत्व किया, बल्कि पूरी दुनिया को शांति और अहिंसा का संदेश दिया। एक ऐसा आदर्शवादी व्यक्ति जिसका जीवन बहुतों के लिए प्रेरणास्रोत था, है और रहेगा। उन्होंने जिन मूल्यों को स्थापित किया उसे गांधी दर्शन की संज्ञा दी जाती है। महात्मा गांधी पर निबंध (Essay on Mahatma Gandhi in hindi) ऐसे जीवट के धनी व्यक्ति के जीवन से परिचित होने का एक अच्छा तरीका है।
This Story also Contains
ये भी पढ़ें : हिंदी में निबंध- भाषा कौशल, लिखने का तरीका जानें
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। अपने विद्यार्थी जीवन, साउथ अफ्रीका प्रवास, चंपारण सत्याग्रह से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन और जीवन के अंतिम पड़ाव तक बापू ने अहिंसा, सत्य, अस्तेय जैसे सिद्धांतों पर आधारित एक ऐसा जीवन बिताया जिसकी कोई दूसरी मिसाल धरती पर बमुश्किल ही मिलेगी। हाड़-मांस से निर्मित ऐसा कोई व्यक्ति कभी इस दुनिया में रहा भी होगा, इस पर लोगों के लिए यकीन कर पाना भी मुश्किल होगा।
गांधी जी ने भारत के लोगों को आत्मनिर्भर होना सिखाया। हर तबके के लोग उन्हें पसंद करते थे तथा उनकी तारीफ करते थे। महात्मा गांधी को 'महात्मा' की उपाधि नोबल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर ने दिया था। वहीं उन्हें 'राष्ट्रपिता' की उपाधि पंडित जवाहर लाल नेहरू ने दी थी। महात्मा गांधी पर निबंध (Mahatma Gandhi essay in hindi) के इस लेख से गांधी जी के जीवन और दर्शन के साथ साथ उनके व्यक्तित्व और कृतित्व की जानकारी भी आपको मिलेगी।
चूंकि महात्मा गांधी का पूरा जीवन समाज को समर्पित था और इसी के लिए वे जिये भी व इसके लिए ही वे शहीद भी हुए, ऐसे में महात्मा गांधी के जीवन से संबंधित जानकारी भारत के प्रत्येक बच्चे को हो, इसके लिए भारतीय शिक्षा व्यवस्था समर्पित है। यही कारण है कि छोटी कक्षाओं के छात्रों को महात्मा गांधी पर निबंध (mahatma gandhi par nibandh) लिखने का कार्य दिया जाता है जिसके माध्यम से वे इस महान शख्सियत के जीवन से परिचित व प्रभावित होते हैं। यहां तक कि कई बार अच्छे अंक के लिए छोटी कक्षा के छात्रों से परीक्षा में भी महात्मा गांधी पर निबंध संबंधी प्रश्न पूछा जाता है। ऐसे में महात्मा गांधी पर निबंध (Mahatma Gandhi par Nibandh) छात्रों के लिए न सिर्फ चारित्रिक, बल्कि शैक्षणिक उत्थान के लिए भी महत्वपूर्ण है।
वहीं कई ऐसे छात्र जो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं या फिर किसी प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं, उनके लिए भी तमाम निबंध के विषयों के बीच राष्ट्रपिता महात्मा गांधी या बापू या महात्मा गांधी पर निबंध (Mahatma Gandhi Nibandh) एक महत्वपूर्ण टॉपिक रहता आया है। ऐसे में महात्मा गांधी निबंध (Mahatma Gandhi Nibandh) विशेष इस लेख के माध्यम से ऐसे छात्रों को भी महात्मा गांधी के जीवन का एक अवलोकन प्राप्त होगा, जिसकी वजह से वे बेहतर प्रदर्शन कर पाने में सक्षम होंगे।
महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को उनके पूरे जीवनकाल में राष्ट्र उत्थान के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यों तथा उनकी स्वयं की उत्कृष्टता की वजह से 'महात्मा' के रूप में जाना जाता है। वे एक प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी तथा अहिंसा के प्रचारक थे जिन्होंने भारत को अहिंसा का पालन करते हुए ब्रिटिश हुकूमत से आजादी दिलाने के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
इंग्लैंड में कानून की पढ़ाई के दौरान उनकी उम्र महज 18 साल थी। इसके बाद उन्होंने लॉ यानी कानून की प्रैक्टिस करने के लिए दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की, जहां अंग्रेजी मूल का न होने के कारण उन्हें शासक वर्ग की रंगभेद नीति का शिकार होना पड़ा। इस घटना से गांधी जी को गहरा आघात पहुंचा। इसके बाद वे ऐसे अन्यायपूर्ण कानूनों में बदलाव लाने के लिए राजनीतिक कार्यकर्ता बन गए।

बाद में, वह भारत लौट आए और उन्होंने अपने देश भारत को अंग्रेजी हुकुमत से स्वतंत्र कराने के लिए एक दुर्जेय और अहिंसक संघर्ष शुरू किया। साल 1930 में, उन्होंने ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह (दांडी मार्च) का नेतृत्व किया जिसने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला कर रख दी। उन्होंने कई भारतीयों को ब्रिटिश अत्याचार से आजादी के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया और कइयों को ब्रिटिश अत्याचार व शोषण से मुक्ति दिलाई।
अन्य लेख पढ़ें -
महात्मा गांधी भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रपिता के रूप में सम्मानित व्यक्तित्व थे। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था।
गांधीजी ने इंग्लैंड से कानून की पढ़ाई की और बाद में दक्षिण अफ्रीका में वकालत की। वहां उन्होंने भारतीयों के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया। दक्षिण अफ्रीका में ही उन्होंने सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को अपने संघर्ष का आधार बनाया।
भारत लौटने के बाद गांधीजी ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे आंदोलनों के माध्यम से अंग्रेजी शासन का विरोध किया। उनका मानना था कि सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर भी बड़े परिवर्तन किए जा सकते हैं। उन्होंने स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने और आत्मनिर्भर बनने का संदेश भी दिया।
गांधीजी सादा जीवन जीते थे और समाज में समानता, स्वच्छता तथा सद्भावना के समर्थक थे। उनके विचारों और आंदोलनों ने भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई को नई दिशा दी। 30 जनवरी 1948 को उनका निधन हो गया। आज भी उनके सत्य और अहिंसा के सिद्धांत पूरी दुनिया के लोगों को प्रेरणा देते हैं।
महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। महात्मा गांधी उन महान लोगों में से एक हैं, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत से भारत को आजादी दिलाने की लड़ाई में भारतीयों का नेतृत्व किया। कानून का अध्ययन करने के लिए इंग्लैंड जाने से पहले, उन्होंने भारत में ही अपनी प्रारम्भिक शिक्षा पूरी की। बाद में उन्होंने ब्रिटिश शासन द्वारा अपमानित और प्रताड़ित भारत के लोगों की सहायता करने का फैसला किया। ब्रिटिश उत्पीड़न का मुकाबला करने के लिए, गांधी जी ने अहिंसा का मार्ग चुना।
आंदोलन - अहिंसक आंदोलनों के लिए गांधी जी का कई बार उपहास किया गया, फिर भी वे भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने अहिंसक आंदोलनों में लगे रहे। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक विश्वविख्यात नेता थे, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए कड़ा संघर्ष किया। गांधी जी ने अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग, सविनय अवज्ञा, सत्याग्रह, भारत छोड़ो आंदोलन जैसे अहिंसक स्वतंत्रता आंदोलन शुरू किए, जिनमें से सभी ने भारत की स्वतंत्रता में सफलतापूर्वक योगदान दिया।
स्वतंत्रता के लिए संघर्ष - एक प्रभावशाली स्वतंत्रता सेनानी के रूप में महात्मा गांधी को कई बार जेल और कैद में रखा गया, फिर भी वे भारतियों के न्याय के लिए ब्रिटिश अत्याचार के खिलाफ लड़ते रहे। उनका अहिंसा और सभी धर्मों के लोगों की एकजुटता में दृढ़ विश्वास था, जिसे उन्होंने स्वतंत्रता के अपने अभियान के दौरान बनाए रखा। कई वर्षों के संघर्षों के बाद, वे और अन्य स्वतंत्रता सेनानी, अंततः 15 अगस्त, 1947 को भारत को एक स्वतंत्र देश के रूप में स्थापित करने में सफल रहे। हालांकि 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे नामक व्यक्ति द्वारा उनकी हत्या कर दी गई।
भारत में, महात्मा गांधी को "बापू" या "राष्ट्रपिता" के रूप में जाना जाता है। बापू का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उन्हें दी गई इन उपाधियों की तरह ही, देश के लिए उनका बलिदान और उनके सिद्धांतों को वास्तविक बनाने के उनके प्रयास, दुनिया भर के भारतीयों के लिए गर्व की बात है।
गांधी जी का बचपन (Gandhi’s Childhood): महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। वह एक हिंदू घर में पले-बढ़े और मुख्य रूप से शाकाहारी थे। उनके पिता करमचंद उत्तमचंद गांधी, पोरबंदर राज्य के दीवान थे। वह दक्षिण अफ्रीका में शांतिपूर्ण विरोध आंदोलन शुरू करने वाले पहले व्यक्ति थे, जो उन्हें अन्य प्रदर्शनकारियों से अलग करता था। महात्मा गांधी ने दुनिया को सत्याग्रह का संदेश दिया, जो किसी भी अन्याय से लड़ने का एक अहिंसक तरीका था।
Get your results instantly with our calculator!
गांधी जी अपने सख्त आदर्शों के लिए जाने जाते थे। वह नैतिकता, सिद्धांतों और अनुशासन का पालन करने वाले व्यक्ति थे, जो आज भी दुनिया भर के युवाओं को प्रेरित और प्रोत्साहित करता है। वह हमेशा जीवन में आत्म-अनुशासन के मूल्य का प्रचार करते थे। उनका मानना था कि यह बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने में बेहद कारगर रहता है, जिसका उपयोग उन्होंने अपने अहिंसा के विचारों को बढ़ावा देने के लिए भी किया। गांधी जी का जीवन इस बात का बेहतरीन उदहारण है कि यदि हम कठोर अनुशासन पर टिके रहते हैं और खुद को उसके लिए प्रतिबद्ध रखते हैं, तो इसकी सहायता से हमें किसी भी उद्देश्य को प्राप्त करने में सफलता मिल सकती है। गांधी जी की इन्हीं विशेषताओं ने उन्हें एक आम व्यक्ति से महान व्यक्ति बनाया, उनकी इन्हीं विशेषताओं की वजह से उन्हें दी गई महात्मा की उपाधि, आज के दौर में भी बिना किसी किन्तु-परंतु के एकदम उचित नजर आती है।
कई सामाजिक सरोकारों पर महात्मा गांधी के प्रभाव को कम करके नहीं आंका जा सकता।
खादी आंदोलन : महात्मा गांधी ने खादी और जूट जैसे प्राकृतिक रेशों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 'खादी आंदोलन' की शुरुआत की। खादी आंदोलन बड़े "असहयोग आंदोलन" का हिस्सा था, जिसने भारतीय वस्तुओं के उपयोग का समर्थन और विदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल का विरोध किया था।
खेती : महात्मा गांधी कृषि के एक प्रमुख समर्थक थे और उन्होंने लोगों को कृषि में काम करने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया।
आत्मनिर्भरता : उन्होंने भारतीयों से शारीरिक श्रम में संलग्न होने का आग्रह किया और उन्हें सादा जीवन जीने और आत्मनिर्भर बनने के लिए संसाधन जुटाने की सलाह दी। उन्होंने विदेशी वस्तुओं के उपयोग से बचने के लिए चरखे से सूती कपड़े बुनना शुरू किया और भारतीयों के बीच स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को प्रोत्साहित किया।
छूआछूत : यरवदा जेल में अपनी नजरबंदी के दौरान, जहां उन्होंने समाज में 'अस्पृश्यता' के सदियों पुराने कुप्रथा के खिलाफ उपवास किया, वहीं उन्होंने आधुनिक समय में ऐसे शोषित समुदायों के उत्थान में काफी मदद भी की। इसके अलावा उन्होंने समाज में शिक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य और समानता को भी बढ़ावा दिया।
धर्मनिरपेक्षता : गांधी ने भारतीय समाज में एक और योगदान दिया, धर्मनिरपेक्षता का योगदान। उनका मानना था कि किसी भी धर्म का सत्य पर एकाधिकार नहीं होना चाहिए। महात्मा गांधी ने अंतर्धार्मिक मित्रता को बढ़ावा दिया।
इन्हें भी देखें -
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, गांधी जी को कई बार अपने समर्थकों के साथ यातना झेलनी पड़ी और उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा, लेकिन इस दौरान भी वो टस से मस न हुए और अपने देश के लिए स्वतंत्रता उनकी प्राथमिक इच्छा बनी रही। जेल जाने के बाद भी वे कभी हिंसा के रास्ते पर नहीं लौटे। उन्होंने विभिन्न स्वतंत्रता आंदोलनों का नेतृत्व किया और "भारत छोड़ो आंदोलन" की शुरुआत की। भारत छोड़ो आंदोलन एक बड़ी सफलता थी। ब्रिटिश शासन से भारत की आजादी में महात्मा गांधी का महत्वपूर्ण योगदान था। साल 1930 में, महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया। यह एक ऐसा आंदोलन था जो किसी भी दमनकारी निर्देश या नियमों का पालन करने से इंकार करता था। नतीजतन, इस रणनीति और इसके प्रवर्तकों को गंभीर हिंसा और क्रूरता का शिकार होना पड़ा।
महात्मा गांधी की मृत्यु शांति और लोकतंत्र के उद्देश्यों पर सबसे विनाशकारी आघात थी। उनके निधन से देश के मार्गदर्शक का वो स्थान खाली रह गया, जिसे कभी भरा नहीं जा सकता।
महात्मा गांधी भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और अहिंसा के पुजारी थे। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उन्हें प्यार से बापू और राष्ट्रपिता कहा जाता है। उन्होंने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर भारत को अंग्रेजी शासन से स्वतंत्र कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था। गांधीजी ने प्रारंभिक शिक्षा भारत में प्राप्त की और आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए, जहां उन्होंने कानून की शिक्षा प्राप्त की।
स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान
गांधीजी ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा को अपना प्रमुख हथियार बनाया। उन्होंने असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे आंदोलनों के माध्यम से अंग्रेजी शासन का विरोध किया। उनका मानना था कि बिना हिंसा के भी अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया जा सकता है।
गांधीजी ने स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग और खादी को बढ़ावा दिया। वे छुआछूत, सामाजिक भेदभाव और अन्य बुराइयों के खिलाफ भी लगातार आवाज उठाते रहे।
गांधीजी के विचार
गांधीजी के जीवन का आधार सत्य, अहिंसा, सादगी और आत्मनिर्भरता था। वे लोगों को प्रेम, भाईचारे और समानता का संदेश देते थे। उनका जीवन आज भी लोगों को कठिन परिस्थितियों में सत्य और अहिंसा का रास्ता अपनाने की प्रेरणा देता है।
निधन
महात्मा गांधी का निधन 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में हुआ। उनके निधन का दिन भारत में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।
उपसंहार
महात्मा गांधी भारत के इतिहास के महानतम नेताओं में से एक थे। उन्होंने अपने विचारों और कार्यों से पूरी दुनिया को सत्य और अहिंसा की शक्ति का संदेश दिया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
कई ऐसे छात्र होते हैं जिन्हें परीक्षा में या गृह कार्य में महात्मा गांधी पर निबंध (mahatma gandhi nibandh) लिखने के लिए दिया जाता है। ऐसे में हर बार महात्मा गांधी पर निबंध लिखना उनके लिए तभी मुमकिन हो सकता है जब उनके पास महात्मा गांधी के बारे में आधारभूत ज्ञान हो। ऐसे में इस लेख में महात्मा गांधी पर 10 लाइन (10 lines on mahatma gandhi in hindi) बिन्दुओं के माध्यम से जोड़ा गया है, जिसे याद रख उन्हें कभी भी महात्मा गांधी निबंध (mahatma gandhi nibandh) लिखने में परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। निम्नलिखित महात्मा गांधी पर 10 लाइन (10 lines on mahatma gandhi in hindi) के माध्यम से महात्मा गांधी के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को एक जगह समेटने की कोशिश की गई है। इन बिन्दुओं को याद रखकर छात्र कभी भी महात्मा गांधी पर निबंध (Essay on Mahatma Gandhi in hindi) लिख सकेंगे।
हम उम्मीद करते हैं कि इस हिंदी में महात्मा गांधी पर निबंध (Essay on Mahatma Gandhi hindi) के माध्यम से गांधी जी पर निबंध (essay on Gandhiji in hindi) लिखने संबन्धित आपकी सारी शंकाओं का समाधान हो गया होगा। महात्मा गांधी पर निबंध (Essay on Gandhiji in hindi) की ही तरह और भी अन्य निबंध पढ़ने के लिए इस लेख में उपलब्ध लिंक्स पर क्लिक करें।
महत्वपूर्ण लेख -
गांधी के बारे में तथ्य :
भारत सरकार सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ताओं, विश्व के नेताओं एवं नागरिकों को वार्षिक महात्मा गांधी शांति पुरस्कार प्रदान करती है। गैर भारतीय पुरस्कार विजेताओं में नेल्सन मंडेला प्रमुख हैं, जो दक्षिण अफ्रिका में नस्लीय भेदभाव और अलगाव उन्मूलन करने के लिए संघर्ष के नेता रहे हैं। गांधी जी को कभी भी नोबल पुरस्कार नहीं मिला हालाकि उनका नामांकन 1937 से 1948 के बीच पांच बार हुआ था। जब 1989 में चौदहवें दलाई लामा को यह पुरस्कार दिया गया तब समिति के अध्यक्ष ने इसे "महात्मा गांधी की स्मृति में श्रद्धांजलि" कहा था। महात्मा गांधी को फिल्मों, साहित्य और थिएटर में चित्रित किया गया है।
महात्मा गांधी भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रपिता थे। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उन्होंने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर भारत को स्वतंत्रता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके विचार और आदर्श आज भी पूरे विश्व को प्रेरणा देते हैं। सादगी, ईमानदारी और देशभक्ति उनके जीवन की विशेषताएँ थीं।
प्रारंभिक जीवन : महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर रियासत के दीवान थे और माता पुतलीबाई धार्मिक विचारों वाली महिला थीं। गांधीजी बचपन से ही सत्यवादी और अनुशासित थे। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर और राजकोट में प्राप्त की। आगे की पढ़ाई के लिए वे इंग्लैंड गए और वहाँ से कानून की शिक्षा प्राप्त की। वकालत करने के लिए वे बाद में दक्षिण अफ्रीका गए, जहाँ उन्होंने भारतीयों के साथ होने वाले भेदभाव को देखा।
दक्षिण अफ्रीका में संघर्ष : दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी को नस्लभेद का सामना करना पड़ा। एक बार उन्हें केवल भारतीय होने के कारण ट्रेन से बाहर निकाल दिया गया। इस घटना ने उनके जीवन को बदल दिया। उन्होंने वहाँ भारतीयों के अधिकारों के लिए संघर्ष शुरू किया और सत्याग्रह आंदोलन चलाया। यहीं से उन्होंने सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को अपनाया।
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान : भारत लौटने के बाद गांधीजी ने स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ कई आंदोलनों का संचालन किया।
असहयोग आंदोलन : सन 1920 में गांधीजी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया। इसका उद्देश्य अंग्रेजी शासन का विरोध करना था। लोगों ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाया।
नमक सत्याग्रह : सन 1930 में गांधीजी ने दांडी यात्रा करके नमक कानून का विरोध किया। यह आंदोलन पूरे देश में प्रसिद्ध हुआ और लाखों लोग इससे जुड़े।
भारत छोड़ो आंदोलन : सन 1942 में गांधीजी ने “करो या मरो” का नारा देते हुए भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन ने स्वतंत्रता की लड़ाई को और तेज कर दिया।
गांधीजी के सिद्धांत : गांधीजी सत्य, अहिंसा और सादगी में विश्वास रखते थे। वे मानते थे कि हिंसा से कभी स्थायी समाधान नहीं मिल सकता। उन्होंने चरखा और खादी को आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनाया। वे सभी धर्मों का सम्मान करते थे और समाज में समानता चाहते थे।
सामाजिक सुधारक के रूप में गांधीजी : गांधीजी केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि महान समाज सुधारक भी थे। उन्होंने छुआछूत और जातिवाद का विरोध किया। वे महिलाओं की शिक्षा और सम्मान के पक्षधर थे। उन्होंने गरीबों और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए भी कार्य किया। 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गांधीजी की हत्या कर दी। उनके निधन से पूरा देश शोक में डूब गया। उनके अंतिम शब्द “हे राम” थे।
महात्मा गांधी का जीवन त्याग, संघर्ष और आदर्शों का प्रतीक है। उन्होंने सत्य और अहिंसा के बल पर भारत को स्वतंत्रता दिलाई। उनके विचार आज भी पूरे विश्व में प्रासंगिक हैं। हमें उनके आदर्शों का पालन करना चाहिए और सत्य, प्रेम तथा अहिंसा के मार्ग पर चलना चाहिए। गांधीजी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
आजाद हिंद फौज के संस्थापक सुभाष चंद्र बोस ने 4 जून, 1944 को सिंगापुर रेडियो से एक संदेश प्रसारित करते हुए महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया था। सुभाष बोस ने कहा था, 'भारत की आज़ादी की आखिरी लड़ाई शुरू हो चुकी है'। महात्मा गांधी के निधन के बाद रेडियो पर दुखद संदेश सुनते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी कहा था कि राष्ट्रपिता अब नहीं रहे। इसप्रकार महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता का संबोधन मिला।
गांधीजी ने कई आंदोलन का नेतृत्व किया। इनमें 1917 में चंपारण आंदोलन, 1918 में खेड़ा आंदोलन, 1919 में खिलाफत आंदोलन, 1920 में असहयोग आंदोलन, 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन सभी महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन (Freedom Movements of Mahatma Gandhi in Hindi) का हिस्सा हैं।
गांधीजी के बचपन का नाम मोहनदास था। मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म उत्तर-पश्चिमी भारत की पोरबंदर रियासत में 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था। उनका परिवार एक अमीर ख़ानदान था। मोहनदास करमचंद गांधी के पिता, करमचंद पोरबंदर रियासत के राजा के दरबार में दीवान थे।
अपने बच्चों को अच्छी परवरिश देने की नीयत से मोहनदास (गांधीजी) के पिता अपने परिवार को रहने के लिए पोरबंदर से राजकोट ले आए। यहां अच्छी पढ़ाई का इंतज़ाम था और मोहनदास को अंग्रेज़ी की शिक्षा दी गई।
13 बरस की उम्र में मोहनदास गांधी की शादी कस्तूरबा से कर दी गई। वो राजकोट की ही रहने वाली थीं और शादी के वक़्त कस्तूरबा, मोहनदास से एक साल बड़ी यानी 14 बरस की थीं। उस दौर में मोहनदास गांधी एक बाग़ी नौजवान थे।
1917 का चंपारण सत्याग्रह ब्रिटिश भारत में महात्मा गांधी के नेतृत्व में किया गया पहला सत्याग्रह आंदोलन था और इसे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण विद्रोह माना जाता है।