गणतंत्र दिवस पर निबंध (Republic Day Essay in hindi) : 26 January Essay in Hindi 100, 200, 500 शब्द
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गणतंत्र दिवस पर निबंध (Republic Day Essay in hindi) : 26 January Essay in Hindi 100, 200, 500 शब्द

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Mithilesh KumarUpdated on 23 Jan 2026, 09:18 AM IST
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गणतंत्र दिवस पर निबंध (Republic Day Essay in hindi) : गणतंत्र दिवस समारोह 26 जनवरी को आयोजित किया जाएगा। भारतीयों के हृदय में गणतंत्र दिवस के प्रति बेहद ही उल्लास रहता है। बच्चों के मन में कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली परेड को देखने का उत्साह देखते ही बनता है। गणतंत्र दिवस परेड में भारत की शक्ति तथा संस्कृति के समायोजन का प्रदर्शन किया जाएगा। ऐसे में हम अपनी जड़ों से जुड़े होने के साथ-साथ वर्तमान में देश की उपलब्धियों का एक चित्र भी देखेंगे। वर्ष 2026 में 77वां गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा।

This Story also Contains

  1. गणतंत्र दिवस पर निबंध 100 शब्द (100 Words Essay on Republic Day in hindi)
  2. गणतंत्र दिवस पर निबंध 200 शब्द (200 Words Essay on Republic Day in hindi)
  3. गणतंत्र दिवस पर निबंध 500 शब्द (500 Words Essay on Republic Day in hindi)
  4. गणतंत्र दिवस का महत्व (Importance of Republic Day in hindi)
  5. 26 जनवरी पर निबंध (2026 के संदर्भ में – 77वाँ गणतंत्र दिवस)
  6. गणतंत्र दिवस पर 10 पंक्ति लिखें (Write 10 lines on Republic Day)
  7. गणतंत्र दिवस परेड कैसे देखें? गणतंत्र दिवस परेड के टिकट का मूल्य क्या है? गणतंत्र दिवस परेड का टिकट कहां से प्राप्त करें?
  8. गणतंत्र दिवस 2026 : राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की 17 झांकियां तथा विभिन्न मंत्रालयों/विभागों/सेवाओं की 13 झांकियां कर्तव्य पथ पर निकलेंगी
  9. गणतंत्र दिवस 2026 : कर्तव्य पथ पर परेड देखने के लिए लगभग 10,000 विशेष अतिथि आमंत्रित
गणतंत्र दिवस पर निबंध (Republic Day Essay in hindi) : 26 January Essay in Hindi 100, 200, 500 शब्द
गणतंत्र दिवस पर निबंध

भारत में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस समारोह बहुत ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह उस दिन की याद दिलाता है जब भारत ने लोकतंत्र के प्रतीक को तौर पर संविधान को अपनाया और सही मायने में गणतंत्र बना। भारतीय नागरिक इस दिन के महत्व को रेखांकित करने के लिए गणतंत्र दिवस मनाते हैं। ब्रिटिश राज से भारत की स्वतंत्रता प्राप्त करने के लगभग तीन साल बाद, 26 जनवरी, 1950 को भारतीयों ने अपना संविधान अपनाते हुए खुद को एक संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया जिसे आधिकारिक तौर पर 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। विद्यार्थी अक्सर यह पूछते हैं कि गणतंत्र दिवस पर निबंध कैसे लिखें। यहां 'गणतंत्र दिवस निबंध' पर कुछ नमूना लेख दिए गए हैं।
गणतंत्र दिवस पर भाषण

गणतंत्र दिवस पर निबंध 100 शब्द (100 Words Essay on Republic Day in hindi)

भारत के नागरिक हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस बड़े उत्साह और जुनून के साथ मनाते हैं। इसे संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य होने के महत्व को जानने के लिए मनाया जाता है। भारतीय संविधान को 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इसके अतिरिक्त, यह ब्रिटिश शासन से भारत की ऐतिहासिक स्वतंत्रता के बाद देश को गणतंत्र बनने और उसको याद करने और जश्न मनाने का दिन है। भारत ने 15 अगस्त, 1947 को ब्रिटिश प्रभुत्व से अपनी स्वतंत्रता प्राप्त की थी। 200 से अधिक वर्षों तक, ब्रिटिश ने भारत पर शासन किया था।

भारत को स्वतंत्रता तो मिल गई, लेकिन देश के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए एक सरकार की तत्काल आवश्यकता थी। देश के नागरिक इस दिन देश की आजादी में उनके योगदान के लिए महान नेताओं और स्वतंत्रता योद्धाओं को याद करते हैं और उनका सम्मान करते हैं।

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गणतंत्र दिवस पर निबंध 200 शब्द (200 Words Essay on Republic Day in hindi)

साल 1950 में 26 जनवरी को हमारा संविधान लागू किया गया था, उस दिन से हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन के बाद हमारा देश सही मायने में लोकतांत्रिक गणतंत्र हो गया। महात्मा गांधी जैसे महापुरुषों और देश की संप्रभुता के लिए लड़ने और अपनी जान देने वाले कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के मेहनत और प्रयास के परिणामस्वरूप भारतीय संविधान को अपनाया गया। यह देश का मौलिक कानून है।

सभी जातियों, धर्मों, रंगों और पृष्ठभूमियों के लोग इस दिन को जबरदस्त उत्साह के साथ एकजुट होकर मनाते हैं। भारतीय सेना इस कार्यक्रम में भाग लेती है और देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित एक बड़ी परेड में इससे जुड़ी भव्यता का प्रदर्शन करती है। राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने और नागरिकों द्वारा देश की रक्षा करते हुए अपनी जान देने वाले शहीदों का सम्मान करने के बाद शुरू होने वाली परेड देश के गौरव और जीवंत विविधता को प्रदर्शित करती है।

स्कूलों में गणतंत्र दिवस का जश्न (Celebration of Republic Day in Schools)

गणतंत्र दिवस के सम्मान में स्कूलों में विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। जबरदस्त ऊर्जा और उत्साह के साथ छात्र विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। सभी शैक्षणिक संस्थान अन्य चीजों के अलावा निबंध लेखन, भाषण, स्केचिंग और पेंटिंग के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित करते हैं। छात्र भारत की आजादी के लिए लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानियों पर नाटक और लघु नाटिका भी प्रस्तुत करते हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता है। झंडोत्तोलन के बाद राष्ट्रगान गाया जाता है। मिठाइयां बांटी जाती है।

गणतंत्र दिवस पर निबंध 500 शब्द (500 Words Essay on Republic Day in hindi)

गणतंत्र दिवस देश के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है। राष्ट्र ने पहली बार 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया। यह दिन उस दिवस से प्रेरित है जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने जवाहरलाल नेहरू को अपना नेता चुना और 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज या स्वतंत्रता दिवस की घोषणा की थी।

भारतीय गणतंत्र दिवस का इतिहास (History of Indian Republic Day in hindi)

गणतंत्र दिवस का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रभाव है। 15 अगस्त, 1947 को भारतीयों ने अंग्रेजों से अपनी आज़ादी वापस ले ली लेकिन हमारे पास कोई संविधान, राजनीतिक दल या शासन संरचना नहीं थी। भारत ने 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया। 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज की घोषणा की गई और पंडित जवाहरलाल नेहरू को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का नेतृत्व करने के लिए चुना गया। हालांकि, 15 अगस्त 1947 को ही हमें आजादी मिली।

भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद, भारतीय संविधान की स्थापना के लिए एक संवैधानिक संसद को चुना गया। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने संविधान-मसौदा समिति का नेतृत्व किया। भारत का संविधान बनाते समय अन्य देशों के संविधानों पर भी विचार किया गया। आखिरकार 166 दिन बाद भारतीय संविधान का निर्माण हुआ।

इसे सभी भारतीय नागरिकों को उनके धर्म, संस्कृति, जाति, लिंग या पंथ की परवाह किए बिना समान अधिकारों की गारंटी देने के लिए डिज़ाइन किया गया था। भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को अपनाया गया और लागू किया गया और उस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में जाना जाता है। इसके अतिरिक्त, यह ब्रिटिश नियंत्रण के अंत और एक गणतंत्र राज्य के रूप में भारत की स्थापना का प्रतीक है।

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दिल्ली में गणतंत्र दिवस (Republic Day in Delhi)

देश की राजधानी, नई दिल्ली, गणतंत्र दिवस परेड की मेजबानी करती है, जिसे रक्षा मंत्रालय आयोजित करता है। भारत का 3 दिवसीय गणतंत्र दिवस उत्सव राष्ट्रपति भवन, राष्ट्रपति के निवास के द्वार पर एक सार्थक समारोह के साथ शुरू होता है। यह इंडिया गेट से होते हुए रायसीना हिल तक कर्तव्य पथ पर चलता रहता है।

परेड में भारत की सांस्कृतिक, सामाजिक और सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया जाता है। भारतीय सेना की नौ से बारह अलग-अलग बटालियन पूरे राजचिह्न और आधिकारिक प्रतीक चिन्ह पहनकर नौसेना और वायु सेना के साथ मार्च करती हैं। इस परेड में भारत के विभिन्न अर्धसैनिक समूहों और पुलिस बलों की बारह टुकड़ियां शामिल रहती हैं। भारत के राष्ट्रपति, जो भारतीय सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ के रूप में कार्य करते हैं, सलामी स्वीकार करते हैं।

गणतंत्र दिवस का महत्व (Importance of Republic Day in hindi)

प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए गणतंत्र दिवस बेहद महत्वपूर्ण दिन है। यह अवकाश, भारत के राष्ट्रीय उत्सवों में से एक, हर किसी में देशभक्ति की भावना जगाता है। यह उन अवसरों में से एक है जो युवा पीढ़ी को हमारी अद्भुत भारतीय विरासत और संस्कृति से परिचित कराने में सहायता करता है। यह वह दिन है जिस दिन हम उन महान नेताओं और स्वतंत्रता योद्धाओं का सम्मान करते हैं जिन्होंने देश की रक्षा में अपना जीवन बलिदान कर दिया।

गणतंत्र दिवस हमें एकजुटता का मूल्य भी सिखाता है। यह दिन हमें बताता है कि एकजुट होकर देश के लोगों ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ संघर्ष में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन किया, जिससे शक्तिशाली ब्रिटिश शासन की नींव हिल गई। महात्मा गांधी के अहिंसा आंदोलन ने हमें दिखाया कि बिना बल प्रयोग या खून बहाए अपने से कहीं अधिक शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी पर कैसे काबू पाया जा सकता है। संविधान यह सुनिश्चित करता है कि देश में कोई जाति, पंथ या धार्मिक भेदभाव न हो और गणतंत्र दिवस इसकी याद दिलाता है।

पुरस्कारों का वितरण (Distribution of Awards)

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर, भारतीय राष्ट्रपति भारत के लोगों को 'पद्म' सम्मान से सम्मानित करते हैं। भारत रत्न या भूषण पद्म पुरस्कार प्राप्त करने के लिए, आपको कोई विशिष्ट उपाधि धारण करने की आवश्यकता नहीं है। एक विशेष समिति लोगों को नामांकित करती है। भारत रत्न और पद्म पुरस्कार दो सर्वोच्च नागरिक सम्मान हैं। भारत रत्न देश का सर्वोच्च सम्मान है। पद्म भूषण पुरस्कार के लिए तीन अलग-अलग श्रेणियां हैं: पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री।

  • दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म विभूषण, असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है।

  • पद्म भूषण असाधारण सराहनीय सेवा के लिए दिया जाने वाला तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है।

  • पद्मश्री भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो अनुकरणीय सेवा के लिए व्यक्तियों को दिया जाता है।

26 जनवरी पर निबंध (2026 के संदर्भ में – 77वाँ गणतंत्र दिवस)

परिचय

26 जनवरी भारत का सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व है—गणतंत्र दिवस। यह वह ऐतिहासिक दिन है जब 1950 में भारत के संविधान को लागू किया गया और देश एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया। आज, 3 जनवरी 2026 से हम 77वें गणतंत्र दिवस की ओर बढ़ रहे हैं। इस वर्ष के उत्सव "वंदे मातरम् – स्वतंत्रता का मंत्र" और "आत्मनिर्भर भारत – समृद्धि का मंत्र" थीम पर केंद्रित हैं। ये थीम भारत की सांस्कृतिक विरासत को याद दिलाती हैं और आत्मनिर्भरता, स्वावलंबन तथा विकास के संकल्प को मजबूत करती हैं।

गणतंत्र दिवस का इतिहास

26 जनवरी 1930 को कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज का संकल्प लिया था। इसी तारीख को 1950 में संविधान लागू होने से यह दिन विशेष बन गया। डॉ. भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता वाली संविधान सभा ने इसे तैयार किया। संविधान ने हमें मौलिक अधिकार दिए—समानता, स्वतंत्रता, न्याय, अभिव्यक्ति की आजादी—और कर्तव्यों की याद दिलाई। इस दिन भारत ब्रिटिश राज से पूर्णतः मुक्त होकर गणतंत्र बना, जहाँ राष्ट्रपति चुने जाते हैं, न कि राजा।

गणतंत्र दिवस कैसे मनाया जाता है?

प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को दिल्ली के कार्तव्य पथ (पूर्व में राजपथ) पर भव्य परेड निकलती है। राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं, सेना की टुकड़ियाँ, आधुनिक हथियार, स्वदेशी मिसाइलें, टैंक और विभिन्न राज्यों के टेबलो दिखाए जाते हैं। इस वर्ष वंदे मातरम् थीम के तहत देशभक्ति गीतों, बैंड प्रदर्शनों और आत्मनिर्भर भारत के तहत मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, हरित ऊर्जा, स्टार्टअप और रक्षा उत्पादन पर फोकस रहेगा।

  • प्रधानमंत्री अमर जवान ज्योति पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
  • मुख्य अतिथि (Chief Guest) के रूप में विदेशी नेता आमंत्रित होते हैं।
  • स्कूल-कॉलेजों में झंडोत्तोलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, निबंध-भाषण प्रतियोगिताएँ होती हैं।
  • पूरे देश में वंदे मातरम् गान और देशभक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

2026 में विशेष महत्व

77वें गणतंत्र दिवस पर वंदे मातरम् 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विशेष महत्व रखता है। यह गीत बंकिमचंद्र चटर्जी ने लिखा, जो स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणा स्रोत बना। साथ ही आत्मनिर्भर भारत का संदेश आज वैश्विक चुनौतियों के बीच और मजबूत हो गया है—चाहे वह स्वदेशी हथियार हों, स्पेस मिशन हों, या वैक्सीन उत्पादन। हम विकसित भारत @2047 के सपने की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ हर नागरिक आत्मनिर्भर बने।

निष्कर्ष

गणतंत्र दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि संकल्प का दिन है। डॉ. अंबेडकर ने कहा था—“राजनीतिक समानता के बिना सामाजिक-आर्थिक समानता संभव नहीं।” हमें संविधान के मूल्यों—न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व—को अपने जीवन में उतारना होगा। जाति-धर्म से ऊपर उठकर एकता बनाए रखनी होगी, पर्यावरण बचाना होगा, ईमानदारी से पढ़ाई-काम करना होगा।

आइए, इस गणतंत्र दिवस पर प्रतिज्ञा करें—हम वंदे मातरम् के भाव को जीवंत रखेंगे और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करेंगे।

भारत माता की जय!

वंदे मातरम्!

जय हिंद!

गणतंत्र दिवस पर 10 पंक्ति लिखें (Write 10 lines on Republic Day)

विद्यार्थियों को गणतंत्र दिवस पर 10 पंक्ति लिखने को कहा जाता है। वे इसके लिए नीचे लिखे वाक्यों की मदद ले सकते हैं।

1. 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था और देश को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया गया था।

2. गणतंत्र दिवस के दिन संविधान के महत्व पर चर्चा की जाती है।

3. 26 जनवरी को देश के स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को श्रद्धांजलि देने का दिन है।

4.नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस का भव्य समारोह आयोजित होता है जिसमें सेना की टुकड़ियां परेड में हिस्सा लेती हैं और 29 जनवरी को बीटिंग रीट्रिट के साथ कार्यक्रम का समापन होता है।

5. भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।

6. बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर संविधान सभा के मसौदा समिति के अध्यक्ष थे। संविधान निर्माण में उनकी भूमिका बहुत अहम रही। उन्हें संविधान का शिल्पकार माना जाता है।

7. गणतंत्र दिवस के दिन सभी स्कूलों, सरकारी व गैर सरकारी दफ्तरों में झंडोत्तोलन होता है। राष्ट्रगान गाया जाता है। मिठाईयां बांटी जाती है और अवकाश रहता है।

8. गणतंत्र दिवस परेड में नई दिल्ली में राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं और राज्यों में राज्यपाल झंडोत्तोलन करते हैं।

9. नई दिल्ली के परेड में तीनों सेनाओं की टुकड़ियों के साथ अर्धसैनिक बल के जवान अपने शौर्य का प्रदर्शन करते हैं।

10. गणतंत्र दिवस के परेड में विदेश से किसी मुख्य अतिथि को आमंत्रित किया जाता है।

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महत्वपूर्ण प्रश्न :

गणतंत्र दिवस परेड कहाँ से शुरू होती है?

गणतंत्र दिवस परेड राष्ट्रपति भवन से शुरू होती है और इंडिया गेट पर ख़त्म होती है।

प्रथम गणतंत्र दिवस पर भारत के राष्ट्रपति कौन थे?

प्रथम गणतंत्र दिवस पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के राष्ट्रपति थे. संविधान लागू होने के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने वर्तमान संसद भवन के दरबार हॉल में राष्ट्रपति की शपथ ली थी और इसके बाद पांच मील लंबे परेड समारोह के बाद इरविन स्टेडियम में उन्होंने राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराया था।

भारतीय संविधान कितने दिनों में तैयार किया गया था?

संविधान सभा ने लगभग तीन साल (2 साल, 11 महीने और 17 दिन सटीक) में भारत का संविधान तैयार किया था। इस अवधि के दौरान, 165 दिनों में 11 सत्र आयोजित किए गए थे।

दिल्ली में 26 जनवरी के राष्ट्रीय आयोजन में क्या-क्या होता है?

26 जनवरी की सुबह प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत होती है। राष्ट्रपति पारंपरिक बग्गी में कर्तव्य पथ पर पहुंचते हैं और एक औपचारिक मार्च पास्ट के दौरान सलामी लेते हैं। इसमें सशस्त्र बल, अर्धसैनिक बल, सहायक नागरिक बल, एनसीसी और एनएसएस की इकाइयां शामिल होती हैं।

गणतंत्र दिवस पर निबंध कैसे लिखें?

गणतंत्र दिवस पर निबंध लिखने के लिए सबसे पहले इसके बारे में बताएं। गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन देश का संविधान लागू हुआ था। यह दिन देश की स्वतंत्रता के बलिदानियों को याद करने और देश के गणतंत्र होने के महत्व को प्रदर्शित करता है। इसके बाद संविधान के बारे में लिखें कि इसे कैसे तैयार किया गया। इसके बाद स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में लिखते हुए देश में गणतंत्र के महत्व को लिखकर इसका समापन करें।

2026 में कौन सा गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है?
इस वर्ष देश में 77वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है।

26 जनवरी 2027 को मुख्य अतिथि कौन होंगे?

26 जनवरी 2027 के गणतंत्र दिवस के लिए अभी मुख्य अतिथि की घोषणा नहीं की गई है। 2025 में भारत के 76वें गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो थे। वर्ष 2024 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को 26 जनवरी के मुख्य अतिथि के रूप में निमंत्रित किया गया।

पहला गणतंत्र दिवस कब मनाया गया था?

भारत ने अपना पहला गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को मनाया था। इसी दिन हमारा संविधान लागू हुआ था तथा भारत एक गणराज्य के रूप में स्थापित हुआ था।

हम गणतंत्र दिवस क्यों मनाते हैं 80 शब्दों में?

26 जनवरी 1950 को स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने के बाद भारत में गणतंत्र दिवस को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया था। गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को इसलिए मनाते हैं, क्योंकि इस दिन देश में संविधान लागू हुआ और साल 1930 में 26 जनवरी को 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' ने ब्रिटिश हुकूमत से पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी।

ये भी देखें :

2026 की गणतंत्र दिवस थीम क्या है?

2026 के गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) की आधिकारिक थीम दो मुख्य भागों में केंद्रित है :

  • स्वावलंबन का मंत्र – वंदे मातरम् (The Mantra of Self-Reliance – Vande Mataram) : यह थीम स्वतंत्रता संग्राम की भावना, देशभक्ति और वंदे मातरम् गीत की 150 वर्ष पूर्ण होने की याद दिलाती है। यह स्वतंत्रता के मंत्र को दर्शाता है।
  • समृद्धि का मंत्र – आत्मनिर्भर भारत (The Mantra of Prosperity – Aatmanirbhar Bharat) : यह थीम आज के भारत पर फोकस करती है—स्वदेशी नवाचार, आर्थिक मजबूती, रक्षा, तकनीक, स्टार्टअप, महिलाओं का सशक्तिकरण, हरित विकास और आत्मनिर्भर भारत अभियान की प्रगति पर।

परेड में टेबलो (झांकियाँ), प्रतियोगिताएँ (पेंटिंग, निबंध, गायन, क्विज़) और अन्य कार्यक्रम इन्हीं थीम पर आधारित हैं।

वंदे मातरम् → भावनात्मक और ऐतिहासिक जुड़ाव (देशभक्ति, स्वतंत्रता का मंत्र)

आत्मनिर्भर भारत → व्यावहारिक और भविष्योन्मुखी (समृद्धि, स्वावलंबन, विकास)

इस वर्ष की परेड में ये थीम कर्तव्य पथ पर झांकियों, फ्लाईपास्ट, टॉर्च रिले और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रमुखता से दिखाई देंगी।

2026 में गणतंत्र दिवस आयोजन में मुख्य अतिथि कौन हैं?

2026 में गणतंत्र दिवस आयोजन में मुख्य अतिथि (Chief Guest) 26 जनवरी 2026 को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय संघ (European Union) के शीर्ष दो नेता आमंत्रित किए गए हैं :

  • उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) – यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष (President of the European Commission)
  • एंटोनियो कोस्टा (António Costa) – यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष (President of the European Council)

यह भारत के इतिहास में पहली बार है जब गणतंत्र दिवस परेड में किसी एकल देश के बजाय यूरोपीय संघ के संयुक्त नेतृत्व को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया है। यह निमंत्रण भारत-यूरोपीय संघ के बीच मजबूत हो रहे रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक है। विशेष रूप से, इस दौरान भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत को अंतिम रूप देने की संभावना है, और उनके दौरे के साथ भारत-ईयू लीडर्स समिट भी नई दिल्ली में आयोजित होगी (संभावित तारीख: 25 या 27 जनवरी)।

यह फैसला अक्टूबर-नवंबर 2025 में चर्चा में आया था, और दिसंबर 2025 तक यूरोपीय संघ ने औपचारिक रूप से निमंत्रण स्वीकार कर लिया।

विशेष बातें:पहले मुख्य अतिथि आमतौर पर किसी देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री होते थे (जैसे 2025 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो)।

2018 में 10 ASEAN देशों के नेता एक साथ आए थे, लेकिन EU के टॉप लीडरशिप का यह पहला संयुक्त आमंत्रण है।

यह कदम भारत की "मल्टी-एलाइनमेंट" विदेश नीति और यूरोप के साथ गहरे संबंधों को दर्शाता है।

कर्तव्य पथ पर होने वाली भव्य परेड में इन दोनों अतिथियों की मौजूदगी समारोह को और भी ऐतिहासिक बना देगी।

'बीटिंग रिट्रीट' नाम का समारोह कहां होता है?

बीटिंग रिट्रीट का आयोजन रायसीना हिल्स पर राष्ट्रपति भवन के सामने किया जाता है, जिसके चीफ़ गेस्‍ट राष्‍ट्र‍पति होते हैं। बीटिंग द रिट्रीट समारोह को गणतंत्र दिवस का समापन समारोह कहा जाता है। बीटिंग रिट्रीट का आयोजन गणतंत्र दिवस समारोह के तीसरे दिन यानी 29 जनवरी की शाम को किया जाता है। बीटिंग रिट्रीट में थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बैंड पारंपरिक धुन बजाते हुए मार्च करते हैं।

गणतंत्र दिवस क्या है और ये क्यों मनाया जाता है?

भारत 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हुआ था और 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ, जिसके तहत भारत देश को एक लोकतांत्रिक, संप्रभु और गणतंत्र देश घोषित किया गया। इसलिए लिए हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।

गणतंत्र दिवस मनाने की परंपरा किसने शुरू की थी?

देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने 26 जनवरी 1950 को 21 तोपों की सलामी के साथ ध्वजारोहण कर भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया था। इसके बाद से हर साल इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है और इस दिन देशभर में राष्ट्रीय अवकाश रहता है।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज किसने डिज़ाइन किया था?

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को पिंगली वेंकैया ने डिज़ाइन किया था। पिंगली ने शुरुआत में जो झंडा डिज़ाइन किया था वो सिर्फ़ दो रंगों का था, लाल और हरा। उन्होंने ये झंडा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के बेज़वाडा अधिवेशन में गाँधी जी के समक्ष पेश किया था। बाद में गांधी जी के सुझाव पर झंड में सफ़ेद पट्टी जोड़ी गई। आगे चलकर चरखे की जगह राष्ट्रीय प्रतीक स्वरूप अशोक चक्र को जगह मिली। भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज को इसके वर्तमान स्‍वरूप में 22 जुलाई 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था। भारत में "तिरंगे" का अर्थ भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज है।

भारत ने अपना संविधान कब ग्रहण किया?

भारत राज्‍यों का एक संघ है। ये संसदीय प्रणाली की सरकार वाला गणराज्‍य है। ये गणराज्‍य भारत के संविधान के अनुसार शासित है जिसे संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को ग्रहण किया था और ये 26 जनवरी 1950 से प्रभाव में आया।

राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार कब दिए जाते हैं?

राष्‍ट्रीय वीरता पुरस्कार भारत में हर साल 26 जनवरी की पूर्व संध्या पर बहादुर बच्चों को दिए जाते हैं। इन पुरस्कारों की शुरुआत 1957 से हुई थी। पुरस्कार के रूप में एक पदक, प्रमाण पत्र और नकद राशि दी जाती है। सभी बच्चों को स्कूल की पढ़ाई पूरी करने तक वित्तीय सहायता भी दी जाती है।

गणतंत्र दिवस पर झंडा कौन फहराता है?

देश के प्रथम नागरिक यानी राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा लेते हैं और राष्ट्रीय ध्वज भी राष्ट्रपति फहराते हैं। राज्य की राजधानियों में गणतंत्र दिवस समारोह के मौक़े पर संबंधित राज्यों के राज्यपाल राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। भारत में दो राष्ट्रीय ध्वज समारोह होते हैं : 1. गणतंत्र दिवस पर और 2. स्वतंत्रता दिवस पर। स्वतंत्रता दिवस समारोह के मौक़े पर प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में राष्ट्रीय झंडा फहराते हैं और राज्य की राजधानियों में मुख्यमंत्री ध्वजारोहण करते हैं।

नई दिल्ली में होने वाली गणतंत्र दिवस की भव्य परेड की सलामी कौन लेता है?

भारत के राष्ट्रपति भव्य परेड की सलामी लेते हैं. वो भारतीय सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ़ भी होते हैं। इस परेड में भारतीय सेना अपने नए लिए टैंकों, मिसाइलों, रडार आदि का प्रदर्शन भी करती है।

गणतंत्र दिवस परेड कैसे देखें? गणतंत्र दिवस परेड के टिकट का मूल्य क्या है? गणतंत्र दिवस परेड का टिकट कहां से प्राप्त करें?

गणतंत्र दिवस परेड 2026, बीटिंग रिट्रीट की फुल ड्रेस रिहर्सल और बीटिंग रिट्रीट के टिकटों की बिक्री 5 जनवरी से शुरू

26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड 2026, 28 जनवरी को बीटिंग रिट्रीट की फुल ड्रेस रिहर्सल और 29 जनवरी को बीटिंग रिट्रीट के मुख्य समारोह की टिकटों की बिक्री 5 जनवरी, 2026 से शुरू हो गई। टिकटों का विवरण इस प्रकार है:

क्रम संख्‍या

आयोजन

टिकटों का मूल्य

समय-सारणी


गणतंत्र दिवस परेड

(26.01.2026)

100/- रुपये

20/- रुपये


5 जनवरी से 14 जनवरी तक सुबह 9 बजे से लेकर दिन का कोटा समाप्त होने तक।


बीटिंग रिट्रीट की फुल ड्रेस रिहर्सल

(28.01.2026)

20/- रुपये


बीटिंग रिट्रीट

(29.01.2026)

100 रुपये/-

टिकटें आमंत्रण की वेबसाइट www.aamantran.mod.gov.in से सीधे खरीदी जा सकती हैं। टिकटें आधार कार्ड, मतदाता पहचानपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट और केंद्र/राज्य सरकार इत्‍यादि द्वारा जारी पहचान पत्र जैसे मूल फोटो पहचान पत्र दिखाकर छह स्थानों पर स्थित बूथों/काउंटरों से भी खरीदी जा सकती हैं। गणतंत्र दिवस, बीटिंग रिट्रीट की फुल ड्रेस रिहर्सल और बीटिंग रिट्रीट- इन तीनों कार्यक्रमों के लिए यही फोटो पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य है। छह स्थानों की जानकारी, टिकट खरीदने की तिथि और समय इस प्रकार हैं:

क्रम संख्‍या

टिकट काउंटर का स्थान

तिथियां और समय

1

सेना भवन (चारदीवारी के अंदर गेट नंबर 5 के पास)




5 जनवरी से 14 जनवरी तक


सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक


दोपहर –दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक

2

शास्त्री भवन (चारदीवारी के अंदर गेट नंबर 3 के पास)

3

जंतर मंतर (मुख्य द्वार-चारदीवारी के अंदर)

4

संसद भवन (स्वागत कक्ष)

5

राजीव चौक मेट्रो स्टेशन (डी ब्लॉक, गेट नंबर 3 और 4 के पास)

6

कश्मीर गेट मेट्रो स्टेशन (कॉन्कोर्स लेवल, गेट नंबर 8 के पास)

गणतंत्र दिवस समारोह 2026 से संबंधित जानकारी https://rashtraparv.mod.gov.in/ पर देखी जा सकती है।

ये भी देखें :

गणतंत्र दिवस 2026 : राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की 17 झांकियां तथा विभिन्न मंत्रालयों/विभागों/सेवाओं की 13 झांकियां कर्तव्य पथ पर निकलेंगी

हर वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में भव्य परेड आयोजित की जाती है। इस दौरान विभिन्न राज्यों की झांकियां निकाली जाती है। 26 जनवरी, 2026 को 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर कुल 30 झांकियां - राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की 17 और मंत्रालयों/विभागों/सेवाओं की 13 झांकियां होंगी। 'स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम' और 'समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत' के व्यापक विषय के साथ, झांकी 150 वर्षों के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम और देश की समृद्ध और जीवंत सांस्कृतिक विविधता में डूबी बढ़ती आत्मनिर्भरता के पीछे देश की तीव्र प्रगति का एक अनूठा मिश्रण प्रदर्शित करेगी। भाग लेने वाली झांकियों की सूची इस प्रकार है:

क्रम संख्या

राज्य / केंद्र शासित प्रदेश / मंत्रालय

विषय



1

असम

अशारिकांडी – असम का टेराकोटा शिल्प ग्राम

2

छत्तीसगढ़

स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्

3

गुजरात

स्वदेशी का मंत्र – आत्मनिर्भरता – स्वतंत्रता: वंदे मातरम्

4

हिमाचल प्रदेश

देवभूमि, वीरभूमि

5

जम्मू एवं कश्मीर

जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प एवं लोक नृत्य

6

केरल

वॉटर मेट्रो एवं 100% डिजिटल साक्षरता: आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर केरल

7

महाराष्ट्र

गणेशोत्सव: आत्मनिर्भरता का आह्वान

8

मणिपुर

समृद्धि की ओर: कृषि क्षेत्रों से अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक

9

नागालैंड

हॉर्नबिल महोत्सव – संस्कृति, पर्यटन एवं आत्मनिर्भरता

10

ओडिशा

मिट्टी से सिलिकॉन तक: परंपरा में निहित, नवाचार के साथ प्रगति

11

पुदुचेरी

शिल्प, संस्कृति की समृद्ध विरासत एवं ऑरोविल की परिकल्पना

12

राजस्थान

मरुस्थल की स्वर्णिम छाप: बीकानेर स्वर्ण कला(उस्ता कला)

13

तमिलनाडु

समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत

14

उत्तर प्रदेश

बुंदेलखंड की संस्कृति

15

पश्चिम बंगाल

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में बंगाल

16

मध्य प्रदेश

पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर

17

पंजाब

श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के शहीदी के 350 वर्ष

18

एयर मुख्यालय

पूर्व सैनिक झांकी: युद्ध के माध्यम से राष्ट्र निर्माण

19

नौसेना मुख्यालय

समुद्र से समृद्धि

20

सैन्य कार्य विभाग

त्रि-सेवा झांकी – ऑपरेशन सिंदूर: संयुक्तता से विजय

21

संस्कृति मंत्रालय

वंदे मातरम् – राष्ट्र की आत्मा की पुकार

22

स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: विकसित भारत की ओर स्कूली शिक्षा

23

आयुष मंत्रालय

आयुष का तंत्र, स्वास्थ्य का मंत्र

24

गृह मंत्रालय (एनडीएमए एवं एनडीआरएफ)

भुज भूकंप: 25 वर्षों की दृढ़ता

25

गृह मंत्रालय (बीपीआरडी)

जन-केंद्रित न्याय प्रणाली: तीन नए आपराधिक कानून – 2023

26

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (सीपीडब्ल्यूडी)

वंदे मातरम् – 150 वर्षों का स्मरणोत्सव

27

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय

भारत कथा: श्रुति, कृति, दृष्टि

28

पंचायती राज मंत्रालय

स्वामित्व योजना: आत्मनिर्भर पंचायत, समृद्ध भारत

29

विद्युत मंत्रालय

प्रकाश गंगा: आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत को ऊर्जा

30

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय

कौशल से सशक्त: आत्मनिर्भर, भविष्य-तैयार भारत

गणतंत्र दिवस 2026 : कर्तव्य पथ पर परेड देखने के लिए लगभग 10,000 विशेष अतिथि आमंत्रित

विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 10,000 विशेष अतिथियों को 26 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली 77 वीं गणतंत्र दिवस परेड के साक्षी बनने के लिए आमंत्रित किया गया है। इन अतिथियों में आय और रोजगार सृजन में अनुकरणीय कार्य करने वाले, सर्वश्रेष्ठ नवप्रवर्तक, शोधकर्ता और स्टार्टअप, स्वयं सहायता समूह और प्रमुख सरकारी पहलों के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले लोग शामिल हैं। राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान और राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों में जन भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से उन्हें आमंत्रित किया गया है। विशेष अतिथियों की सूची नीचे दी गई है:


क्रमांक



वर्ग


विश्व एथलेटिक पैरा चैंपियनशिप के विजेता।



प्राकृतिक खेती करने वाले किसान।



दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत दलहन, तिलहन और मक्का की खेती के लिए सब्सिडी प्राप्त करने वाले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले किसान।



पीएम स्माइल (आजीविका और उद्यम के लिए वंचितों के लिए सहायता) योजना के अंतर्गत पुनर्वास किए गए ट्रांसजेंडरों और भिखारियों।


धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) योजना के लाभार्थी।



प्रशिक्षित मैत्री (ग्रामीण भारत में बहुउद्देशीय कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन) व्यक्ति जो किसानों को पशुपालन सेवाएं प्रदान करते हैं और मवेशी प्रजनन सेवाओं में सुधार करते हैं।



राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत एसआईजीएचटी (ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांज़िशन के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप) कार्यक्रम में हाइड्रोजन उत्पादन और इलेक्ट्रोलाइज़र विनिर्माण के लिए प्रोत्साहन प्राप्त करने वाली कंपनियों के प्रमुख/सीईओ।



गगनयान, चंद्रयान आदि जैसे हालिया आईएसआरओ मिशनों में शामिल सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले वैज्ञानिक/तकनीकी व्यक्ति।



चिकित्सा, औद्योगिक और कृषि अनुप्रयोगों के लिए आइसोटोप उत्पादन के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता/नवप्रवर्तक।



गहरे महासागर मिशन के अंतर्गत शोधकर्ता/वैज्ञानिक।


अटल इनोवेशन मिशन के अंतर्गत अटल टिंकरिंग प्रयोगशालाओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्रों।



विभिन्न अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के विजेता।



प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना के अंतर्गत महिला उत्पादक समूहों को जिन्हें दुग्ध उत्पादन या जैविक खेती के लिए प्रशिक्षण, ऋण और बाजार संपर्क प्रदान किए गए।



खादी विकास योजना के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कारीगरों।



पीएम जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान योजना के लाभार्थी।


आदि कर्मयोगी, आदि सहयोगी और आदि साथी जो स्वास्थ्य, नवाचार, शिक्षा आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में ज्ञान और जागरूकता प्रदान करके आदिवासी नागरिकों को सशक्त बनाने में लगे हुए हैं।



पशुपालन अवसंरचना विकास कोष से ऋण प्राप्त करने वाले व्यक्ति, निजी कंपनियां, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), लघु एवं मध्यम उद्यम आदि।



सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले स्टार्टअप/एमएसएमई।



प्रमुख परियोजनाओं में कार्यरत डीआरडीओ के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले वैज्ञानिक/तकनीकी व्यक्ति।



बायो ई3 नीति के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बायोटेक स्टार्टअप/उद्यमी।



आत्मनिर्भर भारत (एसआरआई) कोष से पूंजी प्राप्त करने वाले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले एमएसएमई।



प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना के अंतर्गत पेंशन प्राप्त असंगठित क्षेत्र के श्रमिक।



कृषि बाजार अवसंरचना कोष से किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को लाभार्थी।



महिला उद्यमी, दिव्यांग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, पूर्व सैनिक जिन्हें प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना के अंतर्गत जनऔषधि केंद्र खोलने के लिए विशेष प्रोत्साहन मिला।



सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले दुकानदार/व्यापारी/एमएसएमई जिन्होंने जीएसटी 2.0 के लाभ ग्राहकों तक पहुंचाए हैं।



नवाचार, अंतरिक्ष, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले स्टार्टअप।



वीर गाथा परियोजना के विजेता।



उन पंचायतों के सरपंच जिन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं में संतृप्ति प्राप्त कर ली है।



प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण योजना के अंतर्गत पक्के मकान प्राप्त करने वाले ग्रामीण लोग।



प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसानों जिन्हें प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों के कारण फसल के नुकसान से वित्तीय सुरक्षा प्रदान की गई।



महिला कॉयर योजना के अंतर्गत प्रशिक्षित सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली महिला कारीगरों।



मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ता।



पीएम स्वनिधि (स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि) योजना के लाभार्थी स्ट्रीट वेंडरों।



पूर्वोत्तर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कारीगर, खिलाड़ी, आदिवासी, उद्यमी, गायक, नर्तक आदि।



पीएम मुद्रा योजना के अंतर्गत ऋण प्राप्त करने वाली महिला उद्यमियों।



सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के निर्माण श्रमिक।


स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत जल योद्धा।


राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एनएमडीएफसी) के लाभार्थी।



पीएम इंटर्नशिप योजना के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले इंटर्न।


राष्ट्रीय स्कूल बैंड प्रतियोगिता के विजेता बच्चे।



राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ता/स्वयंसेवक।



सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली प्राथमिक कृषि ऋण समिति (पीएसीएस)।



सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले माई भारत के स्वयंसेवक।



राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह की सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली महिला सदस्य, लखपति दीदी।



प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत प्रशिक्षित सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कारीगर और शिल्पकार।



कर्तव्य भवन के निर्माण श्रमिक।



जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों, गरीब और वंचितों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति बहुल गांवों, कमजोर आदिवासी समूहों, नल जल कनेक्शन लाभार्थी।



सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बौद्धिक संपदा (आईपी) धारक अर्थात् पेटेंट, डिजाइन, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क।



'मन की बात' के प्रतिभागी।


एसईईडी के स्वयं सहायता समूह आजीविका घटक के अंतर्गत महिला लाभार्थी।


51.

युवा विनिमय कार्यक्रम (वाईईपी)-2026 के विदेशी प्रतिनिधि और उनके साथ आए भारतीय दल।

52.

द्वितीय वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन-2026 में भाग लेने वाले अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय भिक्षु प्रतिनिधिमंडल।

53.

अंतर्राष्ट्रीय खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी ओलंपियाड, जूनियर (आईओएए, जूनियर) 2025 के पदक विजेता।


इन विशेष अतिथियों को कर्तव्य पथ पर प्रमुख स्थान पर बैठाया जाएगा। समारोहों के अतिरिक्त, विशेष अतिथियों के लिए राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, प्रधानमंत्री संग्रहालय और दिल्ली के अन्य प्रमुख स्थानों के भ्रमण की व्यवस्था की गई है। उन्हें संबंधित मंत्रियों से बातचीत करने का अवसर भी मिलेगा।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q: 26 जनवरी को ही गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है?
A:

26 जनवरी को ही गणतंत्र दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि 26 जनवरी 1950 को देश में संविधान लागू किया गया। इसलिए उस दिन को याद करने के लिए 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। हालांकि 26 जनवरी की तिथि को ही गणतंत्र दिवस मनाने के पीछे भी एक वजह है। सन 1929 में दिसंबर में लाहौर कांग्रेस के अधिवेशन में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अध्यक्षता की और इसमें प्रस्ताव पारित कर घोषणा की गई कि अंग्रेज सरकार 26 जनवरी 1930 तक भारत को डोमीनियन यानि स्वायत्त उपनिवेश घोषित करे। उसके बाद पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की गई और सक्रिय आंदोलन आरंभ हुआ। उसके बाद 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। आजादी के बाद 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्वीकार किया गया।

Q: संविधान सभा ने अपना कार्य कब शुरू किया?
A:

भारत के स्वतंत्र हो जाने के बाद संविधान सभा घोषित की गई और उसने अपना कार्य 9 दिसंबर 1946 से आरंभ किया। इसमें डॉ. भीमराव आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि संविधान सभा के प्रमुख सदस्य थे। संविधान निर्माण के लिए कुल 22 समितियां बनाई गई थीं जिसमें ड्रॉफ्टिंग कमेटी सबसे महत्वपूर्ण थी और डॉ. भीमराव आंबेडकर इसके अध्यक्ष थे।

Q: भारत के संविधान में कितने अनुच्छेद हैं?
A:

जब भारत का संविधान लागू किया गया तब संविधान में 22 भाग, 395 अनुच्छेद तथा 12 अनुसूचियां थी। वर्तमान में हमारे संविधान में 25 भाग 448 अनुच्छेद तथा 25 अनुसूचियां है।