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    मकर संक्रांति पर निबंध (Essay on Makar Sankranti in Hindi) - 100, 200 और 500 शब्द
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    मकर संक्रांति पर निबंध (Essay on Makar Sankranti in Hindi) - 100, 200 और 500 शब्द

    Mithilesh KumarUpdated on 16 Sep 2026, 09:28 AM IST

    मकर संक्रांति पर निबंध (Essay on Makar Sankranti in Hindi) - भारत देश धर्म, कृषि-विज्ञान और परंपरा के साथ एक अनूठे सांस्कृतिक देश के तौर पर विश्व में प्रसिद्ध है। इस देश में कई त्योहार धर्म पर आधारित होते हैं तो कई कृषि यानी खेती-किसानी पर। इन्हीं में से एक है मकर संक्रांति। यह सौर वर्ष पर आधारित है जिसमें धर्म, कृषि और विज्ञान सभी का समावेश है। भारतीय लोग प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाते हैं। आमतौर पर यह त्योहार हिंदू समाज के लोग धूमधाम से मनाते हैं। यह विशेष रूप से फसल का त्योहार है। इस त्योहार का उद्देश्य नई फसल के मौसम की शुरुआत की खुशी मनाना है। मकर संक्रांति एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक व ऐतिहासिक पर्व भी है। मकर संक्रांति के दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान के बाद पूजा और दान करते हैं। गंगा नदी के तटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक दिन पहले से ही जुटने लगते हैं और ब्रह्मबेला से ही स्नान के बाद पूजा का दौर शुरू हो जाता है।

    This Story also Contains

    1. मकर संक्रांति का महत्व क्या है?
    2. मकर संक्रांति पर निबंध कैसे लिखें? (How to write essay on Makar sankranti in hindi)
    3. मकर संक्रांति पर निबंध (Essay on Makar Sankranti in hindi) - 100 शब्द
    4. मकर संक्रांति पर निबंध (Essay on Makar Sankranti in hindi) - मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है निबंध? 200 से 300 शब्द में
    5. मकर संक्रांति पर निबंध (स्कूल/कॉलेज के लिए उपयुक्त)
    6. मकर संक्रांति पर निबंध (Essay on Makar Sankranti in hindi) - 500 शब्द
    7. विभिन्न राज्यों में मकर सक्रांति (makar sankranti in different states)
    मकर संक्रांति पर निबंध (Essay on Makar Sankranti in Hindi) - 100, 200 और 500 शब्द
    मकर संक्रांति पर निबंध (essay on makar sankranti in hindi) - 100, 200 और 500 शब्द

    मकर संक्रांति का महत्व क्या है?

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पुराण में कहा गया है कि-

    प्रयागे माघमासे तुत्र्यहं स्नानस्य यद्रवेत्।

    दशाश्वमेघसहस्त्रेण तत्फलं लभते भुवि।।

    अर्थात प्रयाग में माघ मास के अन्दर तीन बार स्नान करने से जो फल मिलता है, वह पृथ्वी पर दस हज़ार अश्वमेध यज्ञ करने से भी प्राप्त नहीं होता। पद्मपुराण में शिवजी नारद से कहते हैं कि जो मानव प्रयाग में माघ स्नान करता है, उसे प्राप्त होने वाले पुण्यकाल की कोई गणना नहीं है।

    मकर संक्रांति पर निबंध कैसे लिखें? (How to write essay on Makar sankranti in hindi)

    कई बार नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल, नेतरहाट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा स्कूलों में भी लघु या दीर्घ स्तर पर मकर संक्रांति पर निबंध (Essay on Makar Sankranti in Hindi) लिखने को कहा जाता है। किसी भी विषय पर निबंध लिखने के लिए मुख्य चरण इस तरह से हैं -

    संक्रांति पर निबंध कैसे लिखा जाता है?

    सबसे पहले परिचय लिखें : मकर संक्रांति के बारे में दो लाइन में बताएं, जैसे मकर संक्रांति हर साल कब मनाया जाता है और मकर संक्रांति का मतलब क्या है ( जैसे- यह सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है।)

    महत्व बताएं : मकर संक्रांति का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और इसके आध्यात्मिक पहलू को बताएं। जैसे नदियों में स्नान के बाद सूर्य को अर्घ देना और दान-पुण्य करना।

    त्योहार से जुड़ी प्रमुख परंपरा बताएं : तिलगुड़, खास व्यंजन बनाने की परंपरा और समुदाय, सद्भाव, आनंद और आध्यात्म का संगम, दान देने के महत्व को समझाएं।

    विविधता को दिखाएं : यह त्योहार देश के अगलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे खिचड़ी, पोंगल, माघ बिहू और उत्तरायण।

    समाज को संदेश दें : त्योहार के दौरान लोगों के एक साथ आने और खुशी बांटने की परंपरा को दर्शाएं।

    निष्कर्ष लिखें : निबंध के अंत में मकर संक्रांति के महत्व और इसके जीवन में लाए जाने वाले सकारात्मक बदलावों को संक्षेप में बताएं।

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    मकर संक्रांति पर निबंध (Essay on Makar Sankranti in hindi) - 100 शब्द

    मकर संक्रांति, "मकर" (Makar) और "संक्रांति" (Sankranti) शब्दों का संयोजन से बना है। मकर संक्रांति (makar sankranti) उस समय को दर्शाता है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। हिंदू धर्म में इस दिन को एक त्योहार के रूप में मनाया जाता है क्योंकि यह बहुत महत्वपूर्ण और शुभ माना जाता है। लोग अनाज की फसल मिलने पर आभार व्यक्त करने के लिए भगवान सूर्य की पूजा करते हैं। विविधता और अनेकता में एकता वाले देश में विभिन्न प्रकार के त्योहार में से एक मकर संक्रांति का अपना अनूठा सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है।

    भारत में लोग यह भी मानते हैं कि सर्दी ख़त्म होने पर दिन की लंबाई बढ़ने लगती है। मकर संक्रांति हिंदू त्योहारों में से एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह उत्सव सौर कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक वर्ष 14 या 15 जनवरी को आयोजित किया जाता है। हिंदू धर्मावलंबी सुबह नदी में स्नान करते हैं और सूर्य भगवान को जल अर्पण कर प्रार्थना करते हैं।

    मकर संक्रांति पर निबंध (Essay on Makar Sankranti in hindi) - मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है निबंध? 200 से 300 शब्द में

    भारत को विविध आबादी और लंबे इतिहास के लिए जाना जाता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के दिन की याद में भारतीय लोग 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाते हैं। मकर संक्रांति भारत के कई हिस्सों में मनाया जाने वाला एक लोकप्रिय त्योहार है। यह फसल का समय है, एक ऐसा समय जब लोग अपने खेतों की उर्वरता या उत्पादकता बनाए रखने के लिए भगवान के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।

    भारतीयों का मानना है कि गंगा में पवित्र स्नान करने से उनकी आत्माएं सभी पापों से मुक्त हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त, यह वर्ष की वह अवधि भी है जब दिन बड़े होने शुरू होते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं।

    मकर संक्रांति की एक और उल्लेखनीय विशेषता यह है कि लोग इस दिन "त्रिवेणी संगम" प्रयागराज में पवित्र स्नान करते हैं, जहां गंगा, यमुना और सरस्वती नदियां मिलती हैं। इस दिन लोगों के मेले को कुंभ मेला के रूप में जाना जाता है।

    त्योहार समुदाय, सद्भाव, आनंद और स्वाद का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए, मकर संक्रांति भारत में मनाई जाने वाली अन्य हिंदू त्योहार के समान ही है। मकर संक्रांति के दौरान परोसे जाने वाले प्राथमिक व्यंजनों में से एक है खिचड़ी। यह मुख्य रूप से चावल, दाल, मटर, गोभी, आलू, मूली, टमाटर और घी से तैयार किया जाता है। खिचड़ी के दिन तिल के लड्‌डू, तले हुए अनाज, गुड़, मूंगफली और सूखा नारियल जश्न मनाने के लिए खाए जाने वाले आम खाद्य पदार्थ हैं।

    ये भी देखें :

    मकर संक्रांति पर निबंध (स्कूल/कॉलेज के लिए उपयुक्त)

    परिचय

    मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पावन त्योहार है, जो सूर्य देव के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। यह उत्तरायण का प्रारंभिक दिन है, जब सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ते हैं और दिन लंबे होने लगते हैं। इस त्योहार को खिचड़ी, पोंगल, उत्तरायण, माघी, लोहड़ी आदि विभिन्न नामों से जाना जाता है।

    धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

    धार्मिक दृष्टि से मकर संक्रांति स्नान-दान का सबसे बड़ा पर्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन गंगा, यमुना, गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने, सूर्य देव को अर्घ्य देने और तिल-गुड़, खिचड़ी, कंबल, अनाज आदि का दान करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। सूर्य को जीवन, ऊर्जा, स्वास्थ्य और सत्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए उनकी आराधना से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं और नई ऊर्जा मिलती है। वैज्ञानिक रूप से यह त्योहार फसल कटाई और ऋतु परिवर्तन से जुड़ा है। उत्तरायण के साथ ठंड कम होती है, फसलें पककर तैयार होती हैं और किसान नई फसल का आभार प्रकट करते हैं। यह दिन कृषि प्रधान भारत के लिए नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक है।

    विभिन्न राज्यों में उत्सव

    भारत की सांस्कृतिक विविधता इस त्योहार में स्पष्ट दिखती है:

    • गुजरात में उत्तरायण – रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाई जाती हैं, पतंगबाजी प्रतियोगिताएँ होती हैं।
    • पंजाब-हरियाणा में लोहड़ी (13 जनवरी) – अलाव जलाकर गीत-नृत्य, मक्की की रोटी और रेवड़ी का आनंद।
    • तमिलनाडु में पोंगल – चार दिन का उत्सव: भोगी (पुरानी चीजें जलाना), पोंगल (चावल-दाल उबालना), मट्टू पोंगल (गाय-बैल पूजा)।
    • आंध्र-कर्नाटक में संक्रांति – तिल-गुड़ की मिठाइयाँ, पतंग और पारिवारिक मिलन।
    • उत्तर भारत में खिचड़ी – खिचड़ी बनाकर दान, तिल-गुड़ का लड्डू बाँटा जाता है।
    • हर जगह तिल-गुड़ का विशेष महत्व है – तिल पापों को जलाता है और गुड़ मीठा जीवन देता है।

    निष्कर्ष

    मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य, कृतज्ञता, दान-परोपकार और नई शुरुआत का संदेश है। यह हमें सिखाता है कि जैसे सूर्य उत्तर की ओर बढ़ता है, वैसे ही हमें भी अपने जीवन में सकारात्मकता, मेहनत और सद्भाव की ओर बढ़ना चाहिए। आइए, इस पर्व पर हम सूर्य देव की तरह तेजस्वी बनें, दान दें, पतंग उड़ाएँ और एक-दूसरे को तिल-गुड़ की तरह मीठी-मीठी शुभकामनाएँ दें।

    जय सूर्य देव! जय मकर संक्रांति!

    मकर संक्रांति पर निबंध (Essay on Makar Sankranti in hindi) - 500 शब्द

    मकर संक्रांति मनाने की वजह क्या है? 14 जनवरी को मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है?

    हर जनवरी में, जब सूर्य मकर राशि या मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो हिंदू लोग मकर संक्रांति का त्योहार मनाते हैं। यह कुछ हिंदू त्योहारों में से एक है जो सौर वर्ष पर आधारित है, यही कारण है कि यह हर साल एक ही दिन 14 जनवरी को मनाया जाता है। कभी-कभी यह 15 जनवरी को भी मनाया जाता है। अन्य सभी त्योहार चंद्र चक्र के अनुसार मनाए जाते हैं। यह दिन भारतीय कैलेंडर में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पौष महीने के अंत और उसके बाद माघ महीने की शुरुआत का प्रतीक है।

    तुलसीदास कृत रामचरित मानस में भी मकर का उल्लेख आया है। याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद तथा प्रयाग माहात्म्य का वर्णन करते हुए तुलसीदास रामचरित मानस में लिखते हैं कि

    माघ मकरगत रबि जब होई। तीरथपतिहिं आव सब कोई॥

    देव दनुज किंनर नर श्रेनीं। सादर मज्जहिं सकल त्रिबेनीं॥2॥

    इसका भावार्थ जानें:-माघ में जब सूर्य मकर राशि पर जाते हैं, तब सब लोग तीर्थराज प्रयाग को आते हैं। देवता, दैत्य, किन्नर और मनुष्यों के समूह सब आदरपूर्वक त्रिवेणी में स्नान करते हैं॥

    मकर के महीने में प्रयाग स्नान का बड़ा महत्व है।

    अनुष्ठान और उत्सव

    दान मकर संक्रांति का एक महत्वपूर्ण पहलू है। जरूरतमंद लोगों को अनाज, चावल और मिठाई आदि देना अनुष्ठान का हिस्सा है। आम धारणा के अनुसार, जो कोई भी खुले दिल से दान करता है, उसे समृद्धि और खुशी का अनुभव होता है और साथ ही भगवान उसके जीवन से सभी समस्याओं को दूर कर देते हैं।

    मकर संक्रांति को धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है जिसे माघी के नाम से जाना जाता है। उगते सूर्य की पूजा करने का एक तरीका यह है कि जल और फूल देते समय गायत्री मंत्र का जाप करें। त्यौहार का मुख्य भोजन तिल और गुड़ का व्यंजन है।

    मकर संक्रांति पर मनाये जाने वाले प्रमुख खेलों में से एक है पतंग उड़ाना। उस दिन हम आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें उड़ते हुए देख सकते हैं। लोहड़ी की रात को, कई समुदाय अनुष्ठान करने और भगवान का सम्मान करने के लिए पूरे राज्य में अलाव जलाते हैं। यह उत्सव एकजुटता और दयालुता के महत्व पर जोर देता है।

    विभिन्न राज्यों में मकर सक्रांति (makar sankranti in different states)

    आइए अब देखते हैं कि भारत के विभिन्न राज्य मकर संक्रांति कैसे मनाते हैं।

    उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश में इस दिन दान का त्योहार मनाया जाता है, जिसे खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। यह प्रयागराज में उस स्थान पर महीने भर चलने वाले माघ मेले की शुरुआत का प्रतीक है जहां आध्यात्मिक नदियां यमुना, गंगा और सरस्वती का संगम है। इस दिन कई लोग खिचड़ी खाने और चढ़ाने के अलावा व्रत भी रखते हैं।

    बिहार : खिचड़ी बिहार में मकर संक्रांति उत्सव का एक अनिवार्य हिस्सा है। लोग गंगा, सरयू, घाघरा, गंडक, सोन आदि नदियों में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन भोजन में खिचड़ी खाने की प्रथा है। उत्सव में उड़द, चावल, सोना, कपड़े और अन्य वस्तुओं का दान भी शामिल है।

    हरियाणा और पंजाब : पंजाब और हरियाणा राज्य इस दिन को लोहड़ी के रूप में मनाते हैं। लोग कैम्प फायर के चारों ओर एकत्रित होते हैं और आग की लपटों में पॉपकॉर्न और चावल के फूल फेंकते हुए नृत्य करते हैं।

    तमिलनाडु : इस दिन को तमिलनाडु में पोंगल के रूप में मनाया जाता है। लेकिन इस क्षेत्र में पोंगल उत्सव अतिरिक्त चार दिनों तक चलता है।

    गुजरात : इस दिन गुजरात में पतंग उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

    महाराष्ट्र : इस दिन को मनाने के लिए, महाराष्ट्र में विवाहित महिलाएं अन्य विवाहित महिलाओं को नमक, तेल और कपास देती हैं।

    मैं मकर संक्रांति का त्यौहार कैसे मनाता हूं

    हर साल, मेरी दादी दोपहर में हमें बैठाती हैं और घर के सभी बच्चों को त्योहार की मूल कहानी सुनाती हैं। उन्होंने हमें बताया कि मकर संक्रांति की जड़ें भारतीय पौराणिक कथाओं में हैं और भगवान संक्रांति ने राक्षस शंकरासुर को मार डाला था, यही कारण है कि इस जीत को याद करने के लिए मकर संक्रांति मनाई जाती है।

    वह यह भी बताती हैं कि कैसे सूर्य के चारों ओर पृथ्वी के आरोहण के साथ मेल खाने के लिए मकर संक्रांति सामान्य से 80 दिन बाद मनाई जाती है। कहा जाता है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तर की ओर बढ़ना शुरू कर देते हैं और इस 'उत्तरायण गति' के कारण इस दिन को उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है। तत्पश्चात सूर्य की पूजा करते हुए हम सभी घर के सभी बड़ों के साथ गायत्री मंत्र का पाठ करते हैं। मेरी मां और दादी भी रात में लोहड़ी की रस्मों के लिए चावल की खिचड़ी, नारियल की चिक्की, गनी की खीर आदि जैसे विशेष व्यंजन तैयार करती हैं।


    2027 में मकर संक्रांति कब है?

    2027 में मकर संक्रांति 15 जनवरी 2027, शुक्रवार को मनाई जाएगी।

    मकर संक्रान्ति मुहूर्त New Delhi, India के लिए

    पुण्य काल मुहूर्त :

    07:15:13 से 12:30:00 तक

    अवधि :

    5 घंटे 14 मिनट

    महापुण्य काल मुहूर्त :

    07:15:13 से 09:15:13 तक

    अवधि :

    2 घंटे 0 मिनट

    संक्रांति पल :

    20:59:01 14, जनवरी को

    आइए जानते हैं कि 2027 में मकर संक्रांति कब है व मकर संक्रांति 2027 की तारीख व मुहूर्त। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति एक प्रमुख पर्व है। भारत के विभिन्न इलाकों में इस त्यौहार को स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मनाया जाता है। हर वर्ष सामान्यत: मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाती है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है, जबकि उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इसी दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है।
    ज्यादातर हिंदू त्यौहारों की गणना चंद्रमा पर आधारित पंचांग के द्वारा की जाती है लेकिन मकर संक्रांति पर्व सूर्य पर आधारित पंचांग की गणना से मनाया जाता है। मकर संक्रांति से ही ऋतु में परिवर्तन होने लगता है। शरद ऋतु क्षीण होने लगती है और बसंत का आगमन शुरू हो जाता है। इसके फलस्वरूप दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी हो जाती है।

    मकर संक्रांति का महत्व

    धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण

    भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक नजरिये से मकर संक्रांति का बड़ा ही महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। चूंकि शनि मकर व कुंभ राशि का स्वामी है। लिहाजा यह पर्व पिता-पुत्र के अनोखे मिलन से भी जुड़ा है।
    एक अन्य कथा के अनुसार असुरों पर भगवान विष्णु की विजय के तौर पर भी मकर संक्रांति मनाई जाती है। बताया जाता है कि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का संहार कर उनके सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया था। तभी से भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा।

    फसलों की कटाई का त्यौहार

    नई फसल और नई ऋतु के आगमन के तौर पर भी मकर संक्रांति धूमधाम से मनाई जाती है। पंजाब, यूपी, बिहार समेत तमिलनाडु में यह वक्त नई फसल काटने का होता है, इसलिए किसान मकर संक्रांति को आभार दिवस के रूप में मनाते हैं। खेतों में गेहूं और धान की लहलहाती फसल किसानों की मेहनत का परिणाम होती है लेकिन यह सब ईश्वर और प्रकृति के आशीर्वाद से संभव होता है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर में मकर संक्रांति को ’लोहड़ी’ के नाम से मनाया जाता है। तमिलनाडु में मकर संक्रांति ’पोंगल’ के तौर पर मनाई जाती है, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार में ’खिचड़ी’ के नाम से मकर संक्रांति मनाई जाती है। मकर संक्रांति पर कहीं खिचड़ी बनाई जाती है तो कहीं दही चूड़ा और तिल के लड्डू बनाये जाते हैं।

    लौकिक महत्व

    ऐसी मान्यता है कि जब तक सूर्य पूर्व से दक्षिण की ओर चलता है, इस दौरान सूर्य की किरणों को खराब माना गया है, लेकिन जब सूर्य पूर्व से उत्तर की ओर गमन करने लगता है, तब उसकी किरणें सेहत और शांति को बढ़ाती हैं। इस वजह से साधु-संत और वे लोग जो आध्यात्मिक क्रियाओं से जुड़े हैं उन्हें शांति और सिद्धि प्राप्त होती है। अगर सरल शब्दों में कहा जाए तो पूर्व के कड़वे अनुभवों को भुलकर मनुष्य आगे की ओर बढ़ता है। स्वयं भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है कि, उत्तरायण के 6 माह के शुभ काल में, जब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं, तब पृथ्वी प्रकाशमय होती है, अत: इस प्रकाश में शरीर का त्याग करने से मनुष्य का पुनर्जन्म नहीं होता है और वह ब्रह्मा को प्राप्त होता है। महाभारत काल के दौरान भीष्म पितामह जिन्हें इच्छामृत्यु का वरदान प्राप्त था। उन्होंने भी मकर संक्रांति के दिन शरीर का त्याग किया था।

    मकर संक्रांति से जुड़े त्यौहार

    भारत में मकर संक्रांति के दौरान जनवरी माह में नई फसल का आगमन होता है। इस मौके पर किसान फसल की कटाई के बाद इस त्यौहार को धूमधाम से मनाते हैं। भारत के हर राज्य में मकर संक्रांति को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है।

    पोंगल

    पोंगल दक्षिण भारत में विशेषकर तमिलनाडु, केरल और आंध्रा प्रदेश में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है। पोंगल विशेष रूप से किसानों का पर्व है। इस मौके पर धान की फसल कटने के बाद लोग खुशी प्रकट करने के लिए पोंगल का त्यौहार मानते हैं। पोंगल का त्यौहार ’तइ’ नामक तमिल महीने की पहली तारीख यानि जनवरी के मध्य में मनाया जाता है। 3 दिन तक चलने वाला यह पर्व सूर्य और इंद्र देव को समर्पित है। पोंगल के माध्यम से लोग अच्छी बारिश, उपजाऊ भूमि और बेहतर फसल के लिए ईश्वर के प्रति आभार प्रकट करते हैं। पोंगल पर्व के पहले दिन कूड़ा-कचरा जलाया जाता है, दूसरे दिन लक्ष्मी की पूजा होती है और तीसरे दिन पशु धन को पूजा जाता है।

    उत्तरायण

    उत्तरायण खासतौर पर गुजरात में मनाया जाने वाला पर्व है। नई फसल और ऋतु के आगमन पर यह पर्व 14 और 15 जनवरी को मनाया जाता है। इस मौके पर गुजरात में पतंग उड़ाई जाती है साथ ही पतंग महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जो दुनियाभर में मशहूर है। उत्तरायण पर्व पर व्रत रखा जाता है और तिल व मूंगफली दाने की चक्की बनाई जाती है।

    लोहड़ी

    लोहड़ी विशेष रूप से पंजाब में मनाया जाने वाला पर्व है, जो फसलों की कटाई के बाद 13 जनवरी को धूमधाम से मनाया जाता है। इस मौके पर शाम के समय होलिका जलाई जाती है और तिल, गुड़ और मक्का अग्नि को भोग के रूप में चढ़ाई जाती है।

    माघ/भोगली बिहू

    असम में माघ महीने की संक्रांति के पहले दिन से माघ बिहू यानि भोगाली बिहू पर्व मनाया जाता है। भोगाली बिहू के मौके पर खान-पान धूमधाम से होता है। इस समय असम में तिल, चावल, नरियल और गन्ने की फसल अच्छी होती है। इसी से तरह-तरह के व्यंजन और पकवान बनाकर खाये और खिलाये जाते हैं। भोगाली बिहू पर भी होलिका जलाई जाती है और तिल व नरियल से बनाए व्यंजन अग्नि देवता को समर्पित किए जाते हैं। भोगली बिहू के मौके पर टेकेली भोंगा नामक खेल खेला जाता है साथ ही भैंसों की लड़ाई भी होती है।

    मकर संक्रांति पर परंपराएं

    हिंदू धर्म में मीठे पकवानों के बगैर हर त्यौहार अधूरा सा है। मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बने लड्डू और अन्य मीठे पकवान बनाने की परंपरा है। तिल और गुड़ के सेवन से ठंड के मौसम में शरीर को गर्मी मिलती है और यह स्वास्थ के लिए लाभदायक है। ऐसी मान्यता है कि, मकर संक्रांति के मौके पर मीठे पकवानों को खाने और खिलाने से रिश्तों में आई कड़वाहट दूरी होती है और हर हम एक सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन में आगे बढ़ते हैं। कहा यह भी जाता है कि मीठा खाने से वाणी और व्यवहार में मधुरता आती है और जीवन में खुशियों का संचार होता है। मकर संक्रांति के मौके पर सूर्य देव के पुत्र शनि के घर पहुंचने पर तिल और गुड़ की बनी मिठाई बांटी जाती है।

    तिल और गुड़ की मिठाई के अलावा मकर संक्रांति के मौके पर पतंग उड़ाने की भी परंपरा है। गुजरात और मध्य प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में मकर संक्रांति के दौरान पतंग महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस मौके पर बच्चों से लेकर बड़े तक पतंगबाजी करते हैं। पतंग बाजी के दौरान पूरा आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से गुलजार हो जाता है।

    तीर्थ दर्शन और मेले

    मकर संक्रांति के मौके पर देश के कई शहरों में मेले लगते हैं। खासकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत में बड़े मेलों का आयोजन होता है। इस मौके पर लाखों श्रद्धालु गंगा और अन्य पावन नदियों के तट पर स्नान और दान, धर्म करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि, जो मनुष्य मकर संक्रांति पर देह का त्याग करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और वह जीवन-मरण के चक्कर से मुक्त हो जाता है।

    महत्वपूर्ण प्रश्न :

    क्या मकर संक्रांति एक सार्वजनिक अवकाश है? (makar sankranti is a public holiday)

    नहीं, अलग-अलग राज्यों में यह प्रतिबंधित अवकाश है। वहीं कुछ राज्यों में और बैंक आदि सस्थानों में छुट्‌टी भी रहती है।

    मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है? (makar sankranti kyon manae jaati hai)

    हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव उत्तरायण हो जाते हैं। सूर्य देव के धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करने के दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है। संक्रांति के दिन भगवान सूर्य की पूजा की जाती है।

    मकर संक्रांति के बारे में कैसे लिखें?

    जिस दिन से सूर्य उत्तर दिशा (उत्तरायण) की ओर बढ़ना प्रारंभ करता है, उस दिन को मकर संक्रांति मनाने हैं। मकर संक्रान्ति (मकर संक्रांति) भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है। मकर संक्रांति पूरे भारत और नेपाल में के साथ विभिन्न राज्यों में भिन्न रूपों में मनाया जाता है। पौष मास में जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है उस दिन इस पर्व को मनाया जाता है।

    साल 2026 के पहले त्योहार मकर संक्रांति की आप सबको ढेर सारी बधाई। यह त्योहार आपके जीवन में नई आशाएं जगाए और जीवन में खुशी और प्यार लाए।

    Frequently Asked Questions (FAQs)

    Q: मकर संक्रांति कब है 14 तारीख या 15 तारीख?
    A:

    पृथ्वी की तुलना में जब सूर्य आकाश में धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, उसी दिन को मकर संक्रांति कहा जाता है। मकर संक्रांति का धार्मिक, ज्योतिष और वैज्ञानिक हर तरह से महत्व हैं और ये सब आपस में जुड़े भी हैं। पिछले कई दशकों से यह तारीख 14 जनवरी को ही पड़ रही थी. लेकिन 2017 के बाद से कभी कभी यह 15 जनवरी को भी आने लगी है। 2025 में यह 14 जनवरी को मनाई गई।

    Q: मकर संक्रांति तारीख और शुभ मुहूर्त क्या है?
    A:

    वर्ष 2025 में 14 जनवरी को सुबह 8 बजकर 55 मिनट पर सूर्य का मकर राशि में प्रवेश हुआ। ऐसे में सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक स्नान दान का शुभ मुहूर्त था। इसमें सुबह 8 बजकर 55 मिनट से लेकर दोपहर में 12 बजकर 51 मिनट तक का समय पुण्य काल था।

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